गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

सोनभद्र में भीड़ के हमले से 3 पुलिसवाले घायल

 | Jan 25, 2011 at 01:23pm


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक युवक की कथित हत्या से उत्तेजित लोगों के हिंसक प्रदर्शन और पथराव से तीन पुलिसकर्मी घायल हो गये। घटना जिले के कोन इलाके की है। 30 साल के स्थानीय युवक अजय कुमार की मौत से नाराज लोग सोमवार देर रात से यहां हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। युवक का शव रविवार को रोरवान लौंगा गांव के समीप से बरामद किया गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक कुमार कुछ दिन पहले अपनी ससुराल रोरवान लौंगा गया था। उसका शव ससुराल से कुछ ही दूरी पर पाया गया। स्थानीय लोग पुलिस को शव न सौंपकर ससुरालवालों पर कुमार की हत्या का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे।

सोमवार रात जब पुलिस अधिकारी गांव के लोगों को यह समझाने गए कि कुमार की हत्या नहीं की गई बल्कि उसकी मौत एक हादसे में हुई। इस पर भीड़ हिंसक हो उठी और उसने पुलिस अधिकारियों पर पथराव कर उनकी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। भीड़ ने पुलिस के वाहनों में आगजनी की भी कोशिश की।

जिले के पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को चारों तरफ से घेर लिया था। सूचना मिलने पर जब अन्य थानों से पुलिस बल मौके पर पहुंचा तब हालात पर काबू पाया जा सका। पथराव में एक पुलिस उपाधीक्षक सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।
कुमार ने कहा कि हालात नियंत्रण में लेकिन तनावपूर्ण हैं। तनाव के मद्देनजर प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) और पुलिसबल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर डेरा डाले हुए हैं।
 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

सोनभद्रः 80 साल की वृद्धा से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

 | Oct 04, 2010 at 01:33pm


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में 80 साल की बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म के आरोपी युवक सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। घटना जिले के म्योरपुर इलाके के दिवारी गांव की है, जहां 27 साल के श्यामलाल ने कथित तौर पर रविवार शाम गांव की ही एक बुजुर्ग महिला फूलसखी (परिवर्तित नाम) के साथ दुष्कर्म किया और फिर फरार हो गया।

म्योरपुर चौकी प्रभारी पी. पी. सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया बुजुर्ग महिला रविवार शाम जंगल के पास अपने खेत गई थी, इसी दौरान वहां से गुजर रहा श्यामलाल पीड़िता को उठाकर जंगल ले गया और मारपीट कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

उन्होंने बताया कि घायल बुजुर्ग महिला का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद से महिला काफी सदमे में है। सिंह ने बताया कि फरार आरोपी श्यामलाल को आज गिरफ्तार कर लिया गया। उसने पूछताछ में बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म और मारपीट की बात कबूल कर ली है।
 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

गरीबों के कल्याण के नाम पर भ्रष्टाचारियों का कल्याण


आईबीएन-7 | Dec 30, 2011 at 05:58pm

सोनभद्र। सोनभद्र में डैम बनाने के आड़ में आम आदमी के पैसे की खुलकर लूट खसोट हो रही है। सिटिजन जर्नलिस्ट अश्विनी सिंह ने खुलासा किया कि सोनभद्र में पब्लिक फंड के करोड़ों रुपए शासन और प्रशासन मिलकर लूट रहा है।

दरअसल सोनभद्र जिले की दूधी तहसील में कन्हर डैम परियोजना का काम शुरू हुआ है। इस डैम के निर्माण से सोनभद्र जिले के 11 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे। लगभग 652 करोड़ रुपए की इस योजना की आड़ में सरकारी अमला योजनाबद्ध तरीके से लूट खसोट रहा है। किसी भी सिंचाई परियोजना के शुरू होने पर डूब क्षेत्र में किसी भी निर्माण को मंजूरी नहीं दी जाती है ना ही पुराने कार्यों को जारी रखा जाता है, लेकिन कन्हर डैम परियोजना में दर्जनों बडे़ प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
यहां के पगन नदी पर 2 करोड़ की लागत से 200 मीटर लंबा पुल बनाया जा रहा है। कन्हर डैम परियोजना की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक ये पुल कन्हर डैम परियोजना के डूब इलाके में है। कन्हर डैम परियोजना 1976 में शुरू की गई थी जिस पर 27 करोड़ की लागत आनी थी कई साल परियोजना पर काम चला और लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च भी हुए लेकिन फिर यह परियोजना अधूरी छोड़ दी गई। लेकिन डूब क्षेत्र में आने वाले इलाके के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी गईं। और अब फिर से ये योजना शुरू होने पर डूब क्षेत्र में विकास के नाम पर पैसा खर्च किया जा रहा है।

पैसों के दुरुपयोग के बारे में अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सभी लोग जानते हैं। लेकिन इस बर्बादी को रोकने की कोई पहल नहीं कर रहा है। सवाल ये है आखिर क्यों। इस पूरे मामले में प्रशासन क्या करने वाला है इस पर कलेक्टर ने कहा कि हम लोग टर्म वाले काम बंद करेंगे और लेकिन शॉर्ट टर्म वाले विकास जारी रहेंगे।
 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने की अभय की मुहिम

 | Sep 01, 2009 at 03:27pm



सोनभद्र। दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलती दुनियां में हम पुरानी परम्पराएं, अपनी सभ्यता, संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए हम साफ हवा, पानी, छांव देने वाली प्रकृति की अनदेखी करने लगे हैं और जो संताने इसकी गोद में पल रही हैं हम उनको ही उनके अधिकारों से दूर कर रहे हैं।

बात हो रही है सोनभद्र के उन आदिवासियों की जो सालों से अपने जंगल को बचाने और उस पर मालिकाना हक पाने के लिए सालों से लड़ रहे हैं। अभय सिंह सोनभद्र के दुद्धी के रहने वाले हैं। उनकी लड़ाई है उन आदिवासियों के लिए जो अपनी परम्परागत भूमि पर मालिकाना हक पाने के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनकी ज़मीन सरकार ने उनसे छीन ली है। जब भी आदिवासियों की ज़मीन का मुद्दा उठता है प्रशासन एक नया आश्वासन दे देता है। अभय इसी मुद्दे को लेकर एसडीएम से मिलने पहुंचे। उन्हें फिर एक और आश्वासन मिल गया। दरअसल प्रशासनिक अधिकारियों को एहसास ही नहीं है कि जिन हज़ारों आदिवासियों से उनकी ज़मीन छीन ली गई है वे किस तरह जीवन बिता रहे हैं।

जंगल और पहाड़ों से घिरे उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिल में करीब 14 लाख की आबादी है। इस इलाके में आधे से ज्यादा लोग आदिवासी हैं। इनकी रोजी रोटी का जरिया है जंगल। ज्यादातर आदिवासी झूम खेती करते हैं यानी कुछ साल एक स्थान पर खेती करने के बाद दूसरी जगह जाकर खेती करना ताकी ज़मीन की उर्वरकता बनी रहे। ऐसे वे सदियों से करते आ रहे हैं। इन आदिवासियों की दिक्कत तब शुरू हुई जब 1980 में केन्द्र सरकार ने देश भर में वन अधिनियम लागू किया। इससे पहले कि आदिवासियों को इस अधिनियम के बारे में बताया या समझाया जाता अधिनियम के तहत उन्हें जंगल से बाहर कर दिया गया। उनके जो खेत खलिहान थे उस पर वन विभाग का कब्जा हो गया। अनपढ़ और सीधे साधे आदिवासियों की समझ में ही नहीं आया कि अचानक ये क्या हो गया।

ज़मीन और झोपड़ियां छिन जान के बाद दर बदर होकर भिखारियों से बदतर ज़िंदगी गुज़ार रहे आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने के लिये बनवासी सेवा आश्रम नाम की संस्था ने वन अधिनियम के खिलाफ 1985 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली जिस पर कोर्ट ने नए सिरे से सर्वे कर जमीन पर आदिवासियों को अधिकार देने का आदेश दिया। लेकिन ये आदेश आदिवासियों के लिए एक नई मुश्किल बन गया। कोर्ट के इस आदेश की आड़ में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देकर उन बाहरी लोगों ने जिनका कभी इस जंगल से वास्ता नहीं था। आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया।

आदिवासियों ने इस ज़्यादती के खिलाफ़ संगठित हो कर आवाज़ उठायी तो केन्द्र सरकार ने दिसम्बर 2006 में अनुसूचित जनजाति और अन्य पारम्परिक वनवासी अधिनियम पारित किया। इसके तहत आदिवासियों को उनके जंगल में जमीन का हक मिलेगा। इसके अलावा जो आदिवासी नहीं हैं लेकिन 75 सालों से जंगल में रह रहे हैं उनको भी जमीन पर कब्जा मिलेगा। इस काम के लिये 4 कमेटियां बनाई गई। लेकिन जब अभय ने सूचना के अधिकार के तहत कमेटी की सूची मांगी तो ये जानकर आश्चर्य हुआ कि बिना गांव के लोगों को शामिल किए इन कमेटियों का गठन कर दिया। जिन लोगों को इन कमेटियों का पदाधिकारी बताया गया था उनको ही इस बात की जानकारी नहीं थी कि वो इसके सदस्य हैं।

जब अभय कुछ गांव वालों को इकठ्ठा कर मामले को अफसरों के सामने ले गए तो अक्टूबर 2008 में नए सिरे से नई ग्राम स्तर की कमेटी गठन करने का आदेश हुआ। कमेटी के सामने लगभग 55 हज़ार लोगों ने अपने दावे पेश किये। ये दावे आज तक कमेटी के दफ़्तर में धूल खा रहे हैं लेकिन एक भी दावेदार को जांच के बाद जमीन का पट्टा नहीं मिला है। इस तरह कल तक जो आदिवासी जल-जंगल-जमीन के मालिक थे आज दर बदर हैं। लेकिन ऐसा अधिक दिनों तक नहीं चल सकता। प्रशासन कितनी भी गहरी नींद में क्यों ना सो जाए अभय उसे जगा कर ही दम लेंगे।

 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

सोनभद्र में करोड़ों के खर्च के बावजूद नहीं पहुंचा पानी

आईबीएन-7 | Aug 26, 2012 at 08:30pm | Updated Aug 29, 2012 at 03:01pm
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सरकार ने पानी की व्यवस्था करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन नतीजा जस का तस रहा है। यहां के लोगों तक पानी पहुंचा ही नहीं है। आईबीएन-7 के सिटिजन जर्नलिस्ट सोनभद्र निवासी अमित बता रहे हैं कि सोनभद्र में अधिकारियों ने सिंचाई योजना की आड़ में किस कदर लूट मचाई है।
सोनभद्र के गांव हर साल पानी की भारी कमी से जूझते हैं। गर्मी में कई गांव के हैंडपंप सूख जाते है और हालात ऐसे हो जाते है कि महिलाओं को पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस इलाके में पेयजल और सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2009 में एक योजना शुरू की गई थी।

योजना के तहत यहां बहने वाली पांडू नदी पर 23 चैकडैम बनाने का काम शुरू किया गया। काम 3 महीनों में यानी 30 जून 2009 तक पूरा कर लिया जाना था। आज चैकडैम के निर्माण की योजना शुरू हुए 3 साल बीत चुके हैं। सिटिजन जर्नलिस्ट अमित ने कई गांवों के चैकडैम का मुआयना किया।

कोन गांव का घगिया इलाके में बने चैक डैम के निर्माण में इतनी घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया गया कि वो पहली बरसात भी नही झेल पाया और धाराशायी हो गया। यहां के मजदूरों का कहना है कि उन्होंने ठेकेदार से कहा लेकिन ठेकेदार ने अच्छा माल नहीं लगाया। इस योजना से 12 गांव के लोगों को पानी की किल्लत से राहत मिलनी थी लेकिन ये चैकडैम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं।

किशनपुरवा गांव के इलाके में भी मिली जानकारी के मुताबिक एक चैकडैम बनना था लेकिन वहां चैकडैम नजर ही नहीं आ रहा। किशनपुरवा गांव में चैकडैम बनना तो शुरू हुआ, लेकिन गढ्ढा खोदकर छोड़ दिया गया और इस काम में लगाए गए सैकड़ों मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दी गई। गांव के सरपंच ने बताया कि तीन चैकडैम बनने थे लेकिन एक भी नहीं बना। मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दी गई। रोरवा गांव इलाके में भी चैकडैम बनाना शुरू किया गया था। 3 साल में काम एक चौथाई ही हो पाया है। आधे अधूरे काम से पैसे भी बर्बाद हुए और नतीजा भी कुछ नहीं निकला।

सिटिजन जर्नलिस्ट ने जो तहकीकात की उसमें पाया कि 3 महीनों में बनने वाले चैकडैम 3 साल में भी नही बन पाए है। 23 में 3-4 चैकडैम ही बने है जो पूरी तरह कारगर नहीं हैं, 12-13 चैकडैम आधे अधूरे हैं और बाकी का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है। चैकडैम के निर्माण में हो रही गड़बड़ियो को रोकने के लिए अमित काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं और इसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

लघु सिंचाई विभाग के इंजीनियर भी इस बारे में कुछ बोलने को राजी नहीं है ना ही उनकी आरटीआई का जवाब दे रहे हैं। जानकारी मांगने पर उनका कहना है कि इस काम की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जा सकती। जबकि आरटीआई विशेषज्ञों का कहना है कि ये सूचना देना पब्लिक इंट्रेस्ट में जायज है।

 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर दो बार हुए जानलेवा हमले



आईबीएन-7 | Jan 04, 2012 at 05:39pm

सोनभद्र। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सबसे बड़ी ताकत हिम्मत होती है। ऐसी ही व्यवस्था के सामने डट कर खड़े हैं सोनभद्र से सिटिज़न जर्नलिस्ट डॉ. अमरनाथ देव पांडे। उनपर दो बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। लेकिन वो जान की परवाह किए बिना भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को जारी रखे हुए हैं।
अमरनाथ देव पांडे पर 20 और 26 जनवरी 2010 को जानलेवा हमले हुए। इसकी वजह ये थी कि उन्होंने अपने गांव में महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के तहत हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। लेकिन उनके प्रयासों को हमलावर रोक नहीं सके और उनकी कोशिशों का नतीजा था कि यहां केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य क्वॉलिटी मॉनिटर की अध्यक्षता में जांच के लिए समितियां आई। दोनों समितियों ने जांच में पाया कि मनरेगा के तहत सोनभद्र में एक साल में 250 करोड़ खर्च किए गए हैं जिसमें भारी अनियमितताएं हुई हैं। जांच समितियों ने हेराफेरी में कई लोगों को दोषी पाया और उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने और उनसे लाखों रुपए का धन वसूलने का प्रस्ताव रखा। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश ग्राम विकास आयुक्त ने जिलाधिकारी को चिट्टी लिखकर दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ़ तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया। इस मामले में अभी जांच चल रही है।

IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

अब IBN7 देखिए अपने आईपैड पर भी। इसके लिए IBNLive का आईपैड एप्स डाउनलोड कीजिए। बिल्कुल मुफ्त!

सपा से कांग्रेस में आए उम्मीदवार का पर्चा हो गया खारिज

 | Jan 30, 2012 at 06:24pm | Updated Jan 30, 2012 at 06:46pm


लखनऊ। उत्तरप्रदेश चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। उसके एक मजबूत समझे जा रहे उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है। इस प्रत्याशी के लिए राहुल गांधी ने भी रैली की थी। सात बार विधायक रह चुके विजय सिंह गौड़ हाल ही में सपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे। गौड़ ने सोनभद्र जिले के दुद्धि से पर्चा भरा था।

विजय सिंह गौड़ सात बार के विधायक रहे हैं। इस चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था। लेकिन गौड़ ने सपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने भी उन्हें अपने टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए आगे कर दिया।

विजय सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करने खुद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी रैली की लेकिन सारे राजनीतिक पैंतरे उस समय फेल हो गए जब नामांकन पत्र की जांच के दौरान विजय सिंह गौड़ का पर्चा खारिज हो गया। विजय सिंह के साथ-साथ ये कांग्रेस के लिए भी एक बड़ा झटका है।
 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

चकबंदी योजना के नाम पर किसानों से धोखाधड़ी

 | Jan 10, 2013 at 07:01pm



सोनभद्र। किसानों को राहत पहुंचाने की नीयत से लागू की गई चकबंदी योजना ने सैकड़ों किसानों जिंदगी बर्बाद कर दी है। सोनभद्र रहने वाले शांति प्रकाश बता रहे हैं कि किस तरह उनके इलाके में चकबंदी के नाम पर सैकड़ों किसानों का वो हाल कर दिया गया कि किसान दर-दर भटक रहे हैं।

दरअसल सोनभद्र के परसौना गांव के सैकड़ों किसानों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकारी रिकार्ड में इन्हें मरा हुआ दिखाकर इनकी जमीन इनसे छीनी जा रही है। सिटिजन जर्नलिस्ट शांति प्रकाश इन लोगों को हक दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। सरकार ने 1995 में परसौना गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू की थी। मकसद था गांव की जमीन को पुनर्नियोजित करना जिससे किसानों की टुकड़ों में बंटी जमीन को एक चक के रूप में उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन परसौना गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान काफी गड़बड़िया हुई।

विभागीय साठ-गांठ के चलते गांव के कुछ दबंग और प्रभावशाली लोगों ने मनमाने ढंग से अच्छे चक अपने नाम करा लिए हैं और मूल काश्तकार को जंगल में बेकार जमीन दे दी गई है। चकबंदी के बाद कई किसानों की भूमि घट रही है तो कुछ लोगों ने भूमि बढ़ाकर पैमाइश करा ली है। गांव के कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रिकार्ड में मृत दर्शाकर उनकी जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। चकबंदी में हुई गड़बड़ियों को ठीक करवाने के लिए परसौना गांव के किसान लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

किसानों के लिए आवाज उठाने पर सिटिजन जर्नलिस्ट को गड़बड़ी करने वालों की तरफ से धमकियां मिलने लगी। दो बार जानलेवा हमले भी हुए जिसकी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। यहीं नहीं, झूठे केस में फंसाने की कोशिश भी चल रही है। लगातार संघर्ष का नतीजा ये रहा कि इस पूरे मामले की जांच पूर्व जिलाधिकारी ने करवाई जिसमें गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने चकबंदी निरस्त किए जाने की संस्तुती भी की। लेकिन काफी वक्त बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन जिलाधिकारी का तबादला हो जाने के बाद आए जिलाधिकारी ने भी न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
 IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

सात साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या


वार्ता | Jan 11, 2013 at 10:08pm

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के विण्डमगंज क्षेत्र में गुरुवार की रात एक व्यक्ति ने सात साल की बालिका के साथ बलात्कार किया। बलात्कार करने के बलात्कारी ने बालिका की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि विण्डमगंज क्षेत्र के हरपुर गांव में शहजाद नामक युवक ने सात साल की बालिका को खेत में ले जाकर बलात्कार किया और भेद खुलने के डर से उसकी हत्या कर दी। इस सिलसिले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!



मनरेगा में हुई लाखों की धांधली का ऐसे हुआ पर्दाफाश

आईबीएन-7 | Aug 07, 2013 at 04:08pm | Updated Aug 07, 2013 at 04:18 pm (संकलन)


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रहने वाले सिटिज़न जर्नलिस्ट प्रमोद चौबे बता रहे हैं कैसे मनरेगा के नाम पर कुछ भ्रष्ट लोगों ने ना सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगया, बल्कि गरीब मजदूरों का पैसा भी हड़प गए। सिटिजन जर्नलिस्ट प्रमोद चौबे एक किसान हैं और सोनभद्र के गोहणा गांव का रहते हैं। प्रमोद चौबे गांव में मनरेगा के तहत तालाब बनाने के नाम पर किस तरह सरकारी पैसे का दुर्उपयोग किया गया ये बताना चाहता हैं।

गोहणा गांव के पास एक नाला बहता है जिसे महदानी नाला कहते हैं। इस नाले पर (2003 साल) में भूमि संरक्षण विभाग ने एक चैक डैम बनाया था। जिससे यहां पानी इकट्टठा हो और लोग अपने खेतों की सिंचाई और पीने के पानी की जरूरत पूरा कर सके। चैक डैम से यहां काफी पानी इकट्ठा था। यहां पहले से बंधी होने के बावजूद साल 2010 में तात्कालीन प्रधान ने यहां मरनेगा के तहत तालाब बनाने की योजना बनाई और इसकी स्वीकृती ले ली। यहां तालाब बनाने का कोई औचित्य ही नहीं था क्योकि यहां तो पहले ही बंधी में पानी इकट्ठा था। इस काम की स्वीकृती ग्राम प्रधान के मांग पत्र पर दी गई। नियम के मुताबिक मांग पत्र पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एंव तकनीकी सहायक के हस्ताक्षर नही कराए गए। यहां तालाब बनाए जाने की जरूरत है या नहीं, ये किसी अधिकारी ने आकर जांच भी नहीं की और काम शुरू कर दिया गया। जिसमें कई गडंबडियां हुई। 

रामदास का कहना है कि परियोजना की जगह पर पुरानी बंधी थी। जिसमें दोनों तरफ बोल्डर की पिचिंग थी, उसमें से बोल्डर को उखाड़कर पूर्व प्रधान ने किसी दूसरी परियोजना में इस्तेमाल कर लिए। मौके पर इनलेट और आउटलेट का निर्माण मानक के मुताबिक न करा कर बिलकुल औचित्यहीन तरीके से कराया गया। तालाब के आउटलेट वाले किनारे के पास जेसीबी से पुरानी बंधी को काट दिया गया है। जिससे तालाब से उपयोगी पानी बेकार में बह जाएगा।

मनरेगा का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए होता है। लेकिन यहां लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। दरअसल तात्कालीन प्रधान ने जेसीबी मशीन से नाले के दो किनारों से मिट्टी उठवाकर एक तरफ डलवा दी। जिससे नाला एक चौकोर तालाब की शक्ल का हो गया। इसके बाद मजदूरों का फर्जी मस्टर रोल बनाकर 7 लाख 84 हजार रुपये की किश्त निकाल ली। यहां जेसीबी से काम किया गया। फिर सिर्फ दो हफ्ते ही मजदूरों को काम दिया गया। यहां जिन मजदूरों ने काम किया है उन्हें पैसे का भुगतान अभी तक नही किया गया है। मजदूर शंभू ने कहा कि मैंने परियोजना में एक हफ्ते काम किया, लेकिन मजदूरी नहीं दी गई। जब मजदूरी मांगते है तो कहते है कि मिल जाएगी। कब मिलेगी। हमारे जॉबकार्ड में मनमाने तरीके से प्रधान लिख देते हैं और मजदूरी भेज दी जाती है। और फिर गांव पर ही विड्रॉल फॉर्म हस्ताक्षर कराकर बैंक से धनराशी निकाल ली जाती है। 

हमने यहां हुई गडबड़ियो की शिकायत खंड विकास अधिकारी और जिला प्रशासन में की। कई बार संबंधित अधिकारियों और जिला कलेक्टर से भी इस सिलसिलें में मुलाकात भी की। काफी जद्दोजहद के बाद यहां विकास खंड़ बभनी से जांच कराई गई। और उन्होंने भी तालाब के औचित्यहीन होने और गड़बड़ियों के बारे में अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया। अधिकारी की रिपोर्ट में लिखा है की बैंक को भेजी गई मजदूरों की सूची में कहीं भी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है। इस परियोजना के मस्टर रोल पर जिस व्यकित के हस्ताक्षर है, उसने लगभग 100-100 मजदूरों की हाजिरी अकेले दर्ज की है और पूरे काम पर कोई भी मजदूर किसी भी दिन अनुपस्थित नहीं हुआ है। इससे साफ है मस्टर रोल भरने में गड़बड़ी की गई है।

रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि लोगों के पास बैंक की पासबुकों को देखने से साफ हुआ कि बैंक भी इस साजिश में सम्मिलित प्रतीत होता है, क्योंकि पासबुकों में जमा धनराशी और निकाली गई घनराशी का विवरण साफ नहीं है। जिससे लाभार्थी यह नहीं जान पाते कि उनके खाते में कितना धन आया और कितना निकाल गया। रिपोर्ट में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद भी आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे मामलों में जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है और पैसे वापस लेने की कार्रवाई की जाती है। जांच की रिपोर्ट जस की तस खंड विकास अधिकारी के पास पड़ी है।

IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

पूरे प्रदेश में एक समान बिजली न दिये जाने पर हाई-कोर्ट ने प्रमुख सचिव ऊर्जा सहित अन्य को किया तलब

  • ः बिजली के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर हाई-कोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस।
  • ः पूर¢ प्रदेश में एक समान बिजली आपूर्ति न किये जाने से नाराज उच्च न्यायालय ने  अख्तियार किया कड़ा रूख। 
  • ः सोनभद्र सहित प्रदेश क¢ अन्य जनपदों को बेहतर बिजली मिलने क¢ जगे आसार। 
  • ः जनपद में हजारा¢ं लोगों ने बिजली बिल व 24 घण्टें बिजली क¢ लिए छ¢ड़ा था सत्याग्रह आन्दोलन। 
  • ः लोक सभा चुनाव में राबर्टसगंज सहित प्रदेश क¢ अन्य लोक सभा क्षेत्रों में भी गरमायेगा बिजली का मुद्दा।
इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने पूर¢ प्रदेश में एक समान विद्युत आपूर्ति किये जाने क¢ अपने आदेश क¢ बावजूद भी सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह व अखिलेश यादव मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश क¢ प्र्रिय जनपदों इटावा, कन्नौज, मैनपुरी व रामपुर क¢ उपभोक्ताओं को चैबिसों घण्टा विद्युत आपूर्ति किये जाने तथा प्रदेश क¢ सोनभद्र सहित अन्य जनपदों को 1 से 16 घण्टे बिजली आपूर्ति किये जाने पर संजय अग्रवाल (आइ्रएएस), प्रमुख सचिव ऊर्जा, कामरान रिजवीं (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, यूपीअीसीए, ए.पी. मिश्रा (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, पूर्वान्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, विजय विश्वास पंत (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, पष्चिमान्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटड, प्रभू नाथ सिंह (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, दक्षिणांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड को अवमानना नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया हे कि एक माह क¢ भीतर प्रदेश क¢ अन्य जनपदों की तरह तथाकथित  वीवीआइ्रपी जनपदों इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, रामपुर, सम्भल में भी समान एकरूपता में विद्युत आपूर्ति सुनिष्चित किये जाने के आदेश क¢ अनुपालन का शपथ पत्र दाखिल करें आदेश का अनुपालन एक माह क¢ भीतर न हा¢ने पर अगली सुनवाइ्र की तिथि 08 मई, 2014 को संजय अग्रवाल (आइ्रएएस), प्रमुख सचिव ऊर्जा, कामरान रिजवीं (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, यूपीअीसीए, ए.पी. मिश्रा (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, पूर्वन्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, विजय विश्वास पंत (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, पष्चिमांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, प्रभूनाथ सिंह (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, दक्षिणांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड को व्यक्तिगत रूप से न्यायालयल क¢ समक्ष हाजिर हा¢ने का आदेश शुक्रवार को एक अवमानना पर सुनवाइ्र क¢ बाद दिया हैं

अवमानना याचिका अनपरा, सोनभद्र क¢ सामाजिक काय्रकता्र पंकज मिश्रा द्वारा 05 जुलाई, 2013 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या-34342 आॅफ 2013 में पारित आदेष जिसमे उत्तर प्रदेश क¢ कुछ तथाकथित  वीवीआइ्रपी जनपदों इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, रामपुर, सम्भल, रायबर¢ली, अमेठी क¢ उपभोकताओं को 24 घण्टे बिजली और प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में 1 से 16 घण्टे बिजली आपूर्ति किये जाने को न्यायालय ने राज्य सरकार का मनमाना पूर्ण व गलत रवैया करार देते हुए प्रदेश क¢ समस्त उपभोकताओं को तत्काल समान रूप से बिजली आर्पूिर्त किये जाने का आदेश दिया था, न्यायालय क¢ आदेश क¢ बावजूद भी जनपद इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, झींझक, रसूलाबाद, कन्चैसी नगर, (जनपद कानपुर देहात), सम्भल, सिरसी नगर (जनपदभीमनगर), रामपुर नगर तथा विधूना नगर (जनपद औरैया) को निर्बाध्य रूप से 24 घण्टे बिजली आपूर्ति की जा रही हे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में न्यायालय क¢ आदेश क¢ बावजूद भी तथाकथित  वीवीआइ्रपी जिलों क¢ समान बिजली आपूर्ति नहीं की जा रही हैंयाचिका में इसी आदेश की अवह¢लना पर सम्बन्धितों क¢ विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही ह¢तु याचना की गई है और प्रदेश क¢ अन्य जनपदों को भी तथाकथित वीवीआइ्रपी जिलों क¢ समान बिजली आपूर्ति की मांग की गई हैं

याचिकाकर्ता क¢ अधिवकता का पक्ष सुनने क¢ बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आदेश की अवमानना माना हैं जिसक¢ बाबत न्यायालय ने सख्त रूप अख्तियार करते हुए यह आदेश दिया कि 05 जुलाई, 2013 को इलाहाबाद हाई-कोर्ट द्वारा पारित आदेश का एक माह क¢ भीतर अनुपान सुनिüिचत किये जाने का शपाि पत्र दाखि नहीं किया जाता हे तो सòी प्रतिवादीगण अगली सुनवाइ्र की तारिख में न्यायालय क¢ समक्ष व्यक्तिगत उपस्थित हा¢। ऐसा नहीं करने पर सम्बन्धितों क¢ विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही की जायेगीं 

महत्वपूर्ण है कि याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय क¢ समक्ष पूर्व में दाखिल जनहित याचिका संख्या-12530 आॅफ 2014 सहयोग सोसाइटी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य में इस बात को गम्भीरता से उठाया गया था कि जनपद-सोनभद्र जो प्रदेश को 1 हजार मेगावाट बिजली देता है और सोनभद्र क¢ 6 लाख से अधिक लोगों का विस्थापन तीन दशक पूर्व बिजली उत्पादन क¢ लिए हुआ है और जनपद बिजली उत्पादन क¢ कारण भारत का सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र बन गया है दूसरी ओर सोनभद्र क¢ उपभोक्ताओं को 10 से 16 घण्टे बिजली तथाकथित  वीआइ्रपी जनपदों से चार गुना महंगी किमत पर दी जा रही है वहीं दूसरी ओर वीवीआइ्रपी जिलों को एक चैथाई दरा¢ं पर 24 घण्ट¢ं बिजली दी जा रही है न्यायालय उपरा¢क्त याचिका को निस्तारित करते हुए प्रबन्ध निदेशक, पूविविनिलि, वाराणसी को 05 मार्च, 2014 को पारित आदेश में याचिका में दर्षाये गये याचिका कर्ता का आरा¢प यह है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर प्रबन्ध निदेशक, पू.वि.वि.नि.लि, वाराणसी द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई और न ही जनपद-सोनभद्र को 24 घण्ट¢ं विद्युत आपूर्ति की जा रही हे, वहीं दूसरी ओर तथाकथित वीवीआइ्रपी जिलों से चार गुना अधिक विद्युत बिल लगातार प्रेषित किया जा रहा हे ओर बडे़ पैमाने पर विद्युत बिल बकाया क¢ आधार पर विद्युत कनेक्शन काटा जा रहा है जिसक¢ पश्चात याचिकाकर्ता द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय क¢ समक्ष न्यायालय द्वारा 05 जुलाई, 2013 को पारित आदेश का अनुपालन न सुनिष्चित किये जाने क¢ बाबत अवमानना याचिका दाखिल की गई जिस पर शुक्रवार को न्यायालय ने उपरा¢क्त आदेश पारित किया हैं 
पंकज मिश्रा
" न्यायालय का यह आदेश लोक सभा चुनाव क¢ समय सत्ताधारी दल क¢ लिये चुनौती क¢ रूप में सामने आया है, जहाँ एक ओर तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों में पूर्व की भाँति 24 घण्ट¢ं विद्युत आपूर्ति बहाल रखना एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय क¢ इस आदेश क¢ अनुसार तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों क¢ समान अन्य जनपदों में अविलम्ब समान रूप से विद्युत आपूर्ति बहाल करना एक बड़ी चुनौती हा¢गी। याचिकाकर्ता क¢ अनुसार सोनभद्र सहित प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों की तरह अविलम्ब बिजली आपूर्ति न किये जाने की स्थिति में तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों क¢ मतदाताओं को मनमाने एवं अवैधानिक तरीक¢ से 24 घण्टा विद्युत आपूर्ति कर प्रभावित करने क¢ प्रकरण पर चुनाव आयोग से हस्तक्षेप कर सम्बन्धित अधिकारियों को अविलम्ब हटाये जाने व पूर¢ प्रदेश में समान विद्युत वितरण व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी जायेगीं।"
शक्ति आनंद
"आगामी लोक सभा चुनाव  से ठीक पहले राबर्टसगंज संसदीय क्षेत्र से उठे इस बिजली क¢ मुद्दे पर इस संसदीय क्षेत्र में लोक सभा में ख्वाहिष पाले नेताओं व दलों का क्या जवाब होगा। यह महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वर्षों से अलग-अलग मंचों से सोनभद्र को बिजली कटौती मुक्त करने की मांग हमेशा से उठती रही है न्यायालय क¢ इस रूख से सोनभद्र क¢ बिजली उपभोक्ताओं में अपने साथ न्याय होने की उम्मीद जगी हैं।"

सोमवार, 6 जनवरी 2014

बिजली बिल नाम पर हो रहे अन्याय के खिलाफ ऊर्जान्चल परिक्षेत्र के लोग लामबंद

ऊर्जान्चल परिक्षेत्र जो ऊर्जा उत्पादन में विश्व में अपना अद्वितीय स्थान रखता है, यहाँ कि उत्पादित बिजली से चहुँओर उजाला एवं विकास हो रहा है, परन्तु ऊर्जान्चल के रहवासियों और यहां के विस्थापितों जिनकी कई पीढ़ीयों ने विस्थापन का दंश झेला है और अपना सर्वश्व राष्ट्रहित में ऊर्जा उत्पादन के लिये समर्पित कर दिया, उन्हीं के साथ बिजली विभाग ऐतिहासिक अन्याय कर रहा है। 

बिजली बिल
जहाँ एक ओर ऊर्जान्चल के धरती से पैदा हुई बिजली से रौशन जनपद इटावा, कन्नौज व मैनपूरी और बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति की जा रही है और बिजली बिल मात्र 445 से 517 रूपये उपभोक्ताओं से लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ऊर्जान्चल के सभी गांव में बिजली भी मयस्सर नहीं है और जिन ग्राम पंचायतों में 16 से 18 घण्टे बिजली आपूर्ति की भी जा रही है, वहां पिछले तीन सालों से ग्रामीण उपभोक्ताओं से बिजली बिल के नाम पर लूट का नया किर्तिमान बनाकर वर्तमान में 1718 रूपये बिजली बिल के नाम पर लूटा जा रहा है। 

जबकि ऊर्जान्चल के 95 प्रतिशत किसान विद्युत उत्पादन हेतु विभिन्न परियोजनाओं की स्थापना के लिये किये गये भूमि अधिग्रहण से भूमिहीन है एवं पीढ़ियों के विस्थापन के दंश के बावजूद भी उन्हें आज तक न तो बिजली की समुचित सुविधा मिल पायी है, दूसरी ओर बिजली बिल के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से चार से पाँच गुना अधिक बिजली बिल वसूली जा रही है। 

पदयात्रा मे में शामिल लोग 
इस समस्या के लिये ऊर्जान्चल वासियों ने 29 दिसम्बर, 2013 को एक ऐतिहासिक अन्याय का विरोध और सोनभद्र को कटौती-मुक्त व निःशुल्क बिजली दिये जाने के लिये एक जन-आन्दोलन का आगाज किया। आन्दोलन के प्रथम-चरण में दिनांक 29 दिसम्बर, 2013 को दिन के 12ः00 बजे से डिबुलगंज से नेहरू चैक थाना-अनपरा तक पदयात्रा कर व 03ः00 बजे सायं से 05ः00 सायं तक आम-सभा करने के पश्चात मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश व अन्य को सम्बोधित ज्ञापन सौपें। यह एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम था, जिसे आम-जनों द्वारा आयोजित किया गया था। जिसमें लोग अपने साथ राष्ट्रीय-ध्वज और बिजली समस्या से सम्बन्धित नारे लिखे तख्ती/पोस्टर लेकर इस कार्यक्रम में भाग लेने में पिछे नहीं रहें।

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

तेल के दाम ऊचाईयों की ओर अग्रसर।

सोनभद्र अरब देषों में अस्थिरता के चलते कच्चे तेल के दाम नई ऊचाईयों की ओर अग्रसर हैं। जिसके चलते जहाँ एक ओर महंगाई काबू में नही आ रहीं है। वही आॅयल सब्सिडी का बोझ बढ़ने से सरकार के राजकोषीय घाटे के बढ़ने का खतरा है। इससे निपटने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम तो बढ़ाये जाते रहे है लेकिन आम लोगों र्का इंधन कहे जाने वाले केरोसिंन पर दी जा रही रियायत सरकार को भारी पड़ रही है। विडंबना यह है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरित होने वाले केरोसिन का बड़ा हिस्सा जरूरत मंदांे के बजाय डीजल मे मिलावट करने के लिए पेट्रोल पंपों और खुले बाजार में विक्रय के लिए कालाबाजारियों के पास पहुंच रहा है। 

उत्तर प्रदेष के सोनभद्र जैसे जिलों में तो आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और केरोसिन माफिया के गठजोड़ ने एक फुलप्रुफ नेटवर्क स्थापित कर लिया है जिसके अतंर्गत तेल के इस खेल में प्रतिमाह लाखों के वारे-न्यारे हो रहे है। वैसे तो सोनभद्र की पहचान यहां स्थापित उद्योगों के चलते रही है लेकिन जिले का म्योरपुर विकास खण्ड बेहद औद्योगिंक सघनता का क्षेत्र है। यहा बिजली उत्पादन और कोयला खनन में संलग्न लगभग आधा दर्जन परियोजनाएं स्थापित है जिनमें हजारों की संख्या में कर्मचारी-अधिकारी कार्यरत है जो षतप्रतिषत गैस कनेक्सन धारक है और भोजन पकाने के लिए इनके घरों में एलपीजी का ही इस्तेमाल होता है हांलाकि यह सभी कर्मी राषन कार्ड धारक भी है जिसके चलते वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अतंर्गत मिलने वाले सभी समानों को लेने की पात्रता रखते है लेकिन आवष्यकता न होने के कारण लगभग नब्बे फिसदी से अधिक परियोजना कर्मचारी व अधिकारी केरोसिन लेने में रूचि नहीं दिखाते और यही से तेल का वह खेल ष्षुरू होता है जो वर्षों से जारी है जो ‘पीडीएस’ में राष्ट्रीय स्तर पर जारी भष्ट्राचार की एक बानगी भी है। आष्र्चय की बात है कि इन हजारेां कर्मचारी कार्ड धारकों द्वारा अपने हिस्से का केरोसिन न लेने के बाद भी जिलापूर्ति विभाग की देख-रेख मंे गोदाम से उसकी पूरी मात्रा का उठान प्रतिमाह किया जाता है लेकिन लाखों की कीमत का यह तेल जाता कहा  है इसे बताने के लिए कोई जिम्मेदार तैयार नहीं है इन राषन कार्डों में तो केरोसिन वितरण संबंधी कोई विवरण दर्ज नहीं है लेकिन आपूर्ति विभाग से अभिलेखों में सब कुछ दुरूस्त दिखाया जाता है सूत्रों से पता चला है आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और कोटेदारों द्वारा आपसी मिली भगत से सरकारी सब्सिडी वाले इस सस्ते तेल को पेेट्रोल पंम्पों पर बेच दिया जाता है जहा इसे महंगे डीजल में मिला दिया जाता है साथ ही इसे खुले बाजार में भी बेचा जाता है जिसे गरीब लोग लगभग तीन गुने कीमत पर खरीदते है। इससे होने वाली मोटी कमाई ने संबंधित सरकारी कर्मियों व कोटेदारों की खाल इतनी मोटी कर दी है कि सवाल करने वाले लोगों को वे धमकाने तक से बाज नहीं आते है। 

इस दौरान आवष्यकता इस बात की है कि व्यापक जांच कराकर गैर जरूरत मंदों के लिए आवंटित केरोसिन कोटे को सोनभद्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्रांे के लिए आवंटित किया जाय। इससे जहाँ गरीबों के घर रोषन होगे वहीं काली कमाई के चलते बना भष्ट जिला आपूर्ति विभाग केरोसिन माफिया और कोटेदारों का नापाक गठजोड़ टूटेगा। यह भष्ट्राचार से जुड़ा मसला तो है ही साथ ही अपराध से भी जुड़ा है क्योकिं  प्रेट्रो पदार्थों के काला बाजारियों मिलावट खोरों के मनेाबल के बढ़ने देने का दुष्परिणाम यूपी में एम. मजंनाथ और महाराष्ट के एडीएम सेानावणे की हत्या के तौर पर देखा जा चुका है साथ ही पत्रकार जे डी ही हत्या भी इसी संदर्भ में की गयी थीं। बेहतर होगा षासन वक्त रहते चेत जाए। नहीं तो इस कालाबाजारी व भष्ट्राचार के खिलाफ उठने वाले हर आवाज को ऐसे ही दबा दिया जायेगा।

विरोध प्रदर्शन को सामंती तरिके से दबाने का उदाहरण सिर्फ उ0प्र0 में ही संभव है। -पंकज कुमार मिश्रा

यह बात तब की है जब वर्ष 2008-2009 में प्रदेष में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी, उस समय उ0प्र0 सरकार की दमनकारी नितियाँ अपने चरम पर है। देश के लोकतान्त्रिक परिदृष्य को धता बताते हुए तानाशाही अब मौलिक स्वरूप को प्राप्त कर चुकी है। इसका ताजातरीन उदाहरण सोनभद्र में पिछले कुछ सालों में विस्थापित हुए आदिवासी-दलितो के एक विरोध प्रदर्शन की कार्यवाही के रूप में दिखायी दिया।  प्रदेश की मुखीया के पुतले को नोटो की माला पहनाकर विरोध करना आदिवासियों दलितो के नेता पंकज मिश्रा को महंगा पड़ा। सोनभद्र में भारी संख्या में आदिवासीयो/दलितो ने प्रदेश सरकार के प्रतिकात्मक पुतले को नोटो की माला पहनाकर विरेाध प्रदर्शन किया। लेकिन लोकतांत्रिक रूप में किए गए विरोध स्थानीय पुलिस ने धारा 144 और अन्य कई धाराओ में आदिवासीयो के नेता और समाजसेवी पंकज कुमार मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया। जमीदारी उन्मूलन के बावजूद भी सन् 1952 से वन विभाग, खनन विभाग, और अन्य सरकारी विभागो के झंझावातो के बीच जुझते हुए आदिवासीयो/दलितो को पंकज कुमार मिश्रा के रूप में उजाले की एक लकीर मिली थी। लेकिन लोकतान्त्रिक तरिके से विरोध प्रदर्शन को सामंती तरिके से दबाने का उदाहरण सिर्फ उ0प्र0 में ही संभव है। 

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

जिले में सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ा रहे हैं अधिकारी

सरकार लगातार नए नए कानून बना कर कितनी भी वाहवाही लूटने की कोशिश करे, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। कंेद्र सरकार और प्रदेश सरकार के द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर जनहित से जुडी अनगिनत योजनाए चलाई जा रही है। इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर आम लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों के ऊपर निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन यह अधिकारी पंचायत स्तर चलने वाली योजनाओं के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से एतराज कर रहे है और सूचना के अधिकार के कानून की धज्जियां उडा रहे है। 

जानकारी के अनुसार, शक्ति आनन्द, ग्राम-औड़ी, जिला-सोनभद्र  में रहते है। उन्होंने ग्राम पंचायत औड़ी, कुलडोमरी, अनपरा, परासी, ककरी, रेहटा आदि में भारत सरकार और प्रदेश सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी सूचना के अधिकार कानून के तहत म्योरपुर ब्लाक से मांगी थी। इसमे ग्राम पंचायत कार्य की वार्षिक रपट, निर्माण कार्य की प्रगति रपट, नाप तौल व विकास कार्यो के रजिस्टर की कापी, नरेगा में दो वर्षो में कितने लोगों ने कार्य किया, गरीब आवासीय योजना में लाभ पाने वाले लोगों के नाम, अतिरिक्त बीपीएल सूची और मिड डे मील में खाने की स्थित के बारे में लिखित प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उनकों योजनाओं के कार्यो के बारे में जानकारी नहीं दी गई। 

शक्ति आनन्द ने ग्राम पंचायत की जानकारी के लिए कार्यालय खण्ड विकास अधिकारी म्योरपुर, जिला पंचायत राज अधिकारी, सेानभद्र, मुख्य विकास अधिकारी, सोनभद्र से कई बार विभिन्न विषयों पर सूचना मांगी थी। हालांकि उन्हें यहां से भी कोई भी जानकारी नहीं दीं गई। इसके बाद उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त लखनऊ उत्तर प्रदेश के यहां अपील की। मगर अभी तक यहां से भी सूचना के अधिकार के लिए कोई कार्यवाई नहीं की गई। सूचना के अधिकार कानून के तहत खण्ड विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी ने भी योजनाओं की सूचना नहीं दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत सूचना नहीं देने के साथ-साथ इस अधिनियम की खुले आम धज्जियां उड़ा रहे है। 

"अपने गांव के आस-पास स्थित ग्रामों में विकास कार्यो व उनमें गुणवत्ता की जानकारी के लिये लगभग तीन वर्षो से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना ब्लाक स्तर से लेकर जिला स्तर तक मांगी जा चुकी है, परन्तु कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर मामलों में उन्हें अभी तक कोई जानकारी सम्बन्धित विभागों द्वारा नहीं प्राप्त कराई गई, कई बार उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा सम्बन्धित विभागों को सूचना उपलब्ध कराने हेतु नोटिस भी जारी की गई है। लेकिन फिर भी अधिकारी टस से मस नहीं हुए और विकास कार्यो के सन्दर्भ में कोई जानकारी देने में आनाकानी करते है।"  - शक्ति आनन्द, ग्राम-औड़ी, जिला-सोनभद्र 

शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

उर्जाचंल मे बेखौफ नकली दवा का चल रहा कारोबार

विगत काफी दिनो से उर्जाचंल परिक्षेत्र मे बडे पैमाने पर नकली दवाओं का कारोबार बेहिचक चल रहा हैै। जिसके लिये न कोई जनप्रतिनीधी या सरकारी अफसर को ही कोई सुध है। बिना मान्यता प्राप्त के ही अनगीनत पैथोलाजी सेन्टर चल रहे है कोई भी मरीज मर्ज से राहत न मिलने पर डाक्टर को ही दोषी ठहराता है। डाक्टर द्वारा लिखे रक्त जाचं पेषाब जाचं या मल जॅंाच को बिना मान्यता प्राप्त पैथोलाजी सेन्टर से मिले गलत रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर द्वारा दवा लिखना और मेडिकल स्टोर से नकली दवा मीलना मरीज को सीधा मौत का रास्ता दिखा रहा है। किसी धायल व्यक्तिी को चोट लगने के बाद किए गये एक्सरे मे डाक्टरो द्वारा हड््डी मे हेयर कै्रक के नाम पर पन्द्रह दिन से एक महीने के लिए प्लास्टर चढा देना डाक्टरो के लिए आम बात हो गया है। 

अनपरा चिकित्सालय मे जो भी दवा र्कमचारीयो के लिए या ग्रामीणो के लिए आती है उसे बडी सफाई से वहां के र्कमचारी अस्पताल से निकाल कर नजदीकी मेडीकल स्टोरो पर कम दामो पर बडी सफाई से बेच देते है। समस्त डाक्टरो से प्रार्थना है कि मराीज के र्मज को अगर नही पकड पाते है तो उन्हे उचित समय पर अच्छे जगह पर ईलाज के लिए रेफर कर दें। न की उस पर रिर्सच कर मरीज को मौत की राह पर ले जाये इलाज के नाम पर चल रहे अवैध गोरख घन्धे पर कडाई से लगाम लगाने की जरुरत आ गयी है। जनता का खामोश रहना इस व्यवसाय को बढावा दे रहा है। प्रदूषण नियन्त्रण विभाग द्वारा जब भी किसी पावर प्लाटं को कारखाना बनाने की अनुमति प्रदान की जाती है। तब मुख्यतः पांच चीजो को नजदीकी ग्रामीण क्षेत्र को प्रदान करनी होती है। पानी, रोड, शिक्षा, चिकित्सा, और बिजली तभी कारखाना खोलने की अनुमति मिलती है। 

निजी संस्थानो द्वारा ग्रामीण क्षेत्र को यह सभी सुविधा मिल रहा है। अनपरा कारखाने द्वारा यह सुविधा मात्र डिबुलगंज को ही दिया जा रहा है। अनपरा कारखाने के खुलते समय अधिकृ््ृति की गयी जमीनो मे काफी हिस्सा औडी एवं अनपरा ग्राम सभा का सरकार द्वारा अधिकृत किया गया था। इसके बाद भी ये ग्राम सभा इन पॅाचो सुविधा से वंचित है। औडी ग्राम सभा के बच्चो को स्कूल जाने हेतू सडक मार्ग न देना, रोड की व्यवस्था इनकी स्वयं खराब है। इससे भी औडी वासी वंचित है, पानी एवं बिजली ये केवल डिबुलगंज को ही मुहैया करा रहे है। चिकित्सालय मे इनके कोई भी चिकित्सक इलाज हेतू बैठता ही नही है। सभी चिकित्सक अपने धरो पर परामर्श शुल्क 200 रु ले कर ही ग्रामीणो का इलाज करते हुए बडी आसानी से देखे जा सकते है। जनप्रतिनिघी केवल सडको पर प्रर्दशन कर अखबार मे फोटो खिचवा कर ही इसे हासील करने मे अपना बडप्पन समझते है, जबकी न्यायालय द्वारा इसे सहजता से हासिल कर सकते है। पहले के डाक्टर को जनता भगवान की नजर से देखते थे। अब के डाक्टर को धनवान की नजर से देखा जाता है।                                                                                                                                                                                         

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

लालटावर का आदर्श तालाब हो रहा प्रदूषित

कूड़े से पाटा जा रहा है तालाब
साफ-सफाई के अभाव में तेजी से खो रहा है अपना अस्तित्व

ग्राम सभा अनपरा के लालटावर बस्ती में बनाया गया आदर्श तालाब गंदगी से पटता जा रहा है। आलम यह है कि आसपास के बस्ती के लोग अपने घरों का कूड़ा इस तालाब में फेंककर इसका अस्तित्व ही समाप्त करने पर तुले हुए हैं। वहीं ग्राम सभा सहित अन्य कार्यदायी संस्था भी इसका साफ-सफाई कराने में कोई रुचि नहीं ले रही है। तीन वर्ष पूर्व अनपरा ग्राम सभा के लालटावर बस्ती में बना आदर्श तालाब गंदगी के चलते मच्छर प्रजनन का महफूज स्थान हो गया है। डाला छठ के समय तो इस घाट पर मेले की मानिंद भीड़ लगती थी। लेकिन गंदगी के चलते इस साल नाम मात्र के लोग ही इस घाट पर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आए। जिन वजहों से इस तालाब का निर्माण किया गया था वह रख-रखाव के अभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। न तो इस तालाब के साफ-सफाई का कोई प्रबंध नहीं है। इस महत्वपूर्ण तालाब को अगर सहेज कर नहीं रखा गया तो शीघ्र ही इसका अस्तित्व समाप्त हो सकता है। अनपरा गांव में चार सफाई कर्मियों की नियुक्ति की है लेकिन वे काम के प्रति उदासीन हैं। बीस लाख की लागत से बना यह तालाब वर्तमान में लाभ से अधिक हानिकारक सिद्ध हो रहा है कहा कि इस तालाब में बजबजा रही गंदगी में अनगिनत मच्छर पनप रहे हैं, उन्होंने इसकी नियमित सफाई की मांग की। 

 कैलाश घूसिया
" वर्तमान में वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के किनारे काशीमोड़ पर पक्की नाली बनाने का कार्य चल रहा है, जैसे ही यह पूरा होगा इस तालाब की भी साफ-सफाई करा दी जाएगी।" - कैलाश घूसिया, ग्राम प्रधान, अनपरा।

एक जमीन के लिए दो बार मुआवजा चाहते हैं प्रभावित लोग

दादा ने लिया मुआवजा, अब नाती लाइन में
नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजे के लिए केस
ग्राम सभा की ओर से हाईकोर्ट पहुंचा अधिग्रहण का मामला

कनहर सिंचाई परियोजना अब भी मकड़जाल में फंसी हुई है। इसमें दादा ने मुआवजा ले लिया, अब उनके नाती मुआवजा की दावेदारी कर रहे हैं। इनकी मांग है कि पुनर्स्थापित के बाद ही उनकी जमीन ली जाए। कुछ मामले ऐसे भी हैं कि जो मुआवजा कम मिलने की दलील देकर कोर्ट चले गए हैं। ग्राम सभा की ओर से दायर मुकदमे में नई अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजे की मांग की गई है।

कनहर सिंचाई परियोजना का उद्घाटन 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने किया था। इस परियोजना से हजारों एकड़ जमीनों को खेती के लिए पानी देना था। इसमें 11 गांव के लोगों को विस्थापित होना है। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत जमीन अधिग्रहण में आती रही। कुछ लोग इसका विरोध भी करते रहे। दूसरे इस योजना को सियासत ने भी लटका दिया। सरकार बदलती गई लेकिन योजना शुरू नहीं हो सकी। 1979-81 के बीच कुछ लोगों को दो हजार रुपये बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया गया। साथ में प्लाट देने का भी वादा किया था। सूत्रों के अनुसार उनकी जमीन का ट्रांसफर नहीं कराया गया। यानी रिकार्ड में अब भी जमीन इनकी है। इन लोगों ने दोबारा मुआवजे के लिए कोर्ट का सहारा ले लिया है। जिस जमीन का मुआवजा दिया जा चुका है। उसके परिवार के दूसरे दावेदार तैयार हो गए हैं। ग्राम सभा की ओर से दायर किए गए मुकदमे में नई अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजा देने की बात की गई है।

इधर सात नवंबर को सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने कनहर परियोजना का शुभारंभ कराया। इसके साथ दस करोड़ रुपये दिए और पुनर्स्थापन और उचित मुआवजे की बात कही। इसके बाद कनहर परियोजना शुरू होनी उम्मीद जगी है, लेकिन अभी कई पेच फंस रहे हैं। कनहर बचाओ संघर्ष समिति अपना विरोध जता ही रही है। लोग कोर्ट भी चले गए हैं।

नई अधिग्रहण नीति के तहत विस्थापितों को मुआवजा मिलना चाहिए। मुआवजा देकर कनहर परियोजना को जल्द से जल्द बनाना चाहिए। जिससे हजारों एकड़ भूमि की पैदावार बढ़े और किसान खुशहाल हो सकें।
-प्रभु सिंह, सचिव कनहर बनाओ संघर्ष समिति

संविधान के 73 संशोधन के अनुसार ग्राम पंचायतों की सहमति के बाद ही विस्थापित किया जाए। इसके साथ ही विस्थापन के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। उनके अधिकार से वंचित न किया जाए। इसके लिए हाईकोर्ट में रिट दायर किया गया है। हम लोग अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं।
-महेशानंद, कनहर बचाओ संघर्ष समिति

परियोजना में मुआवजे के लिए प्रशासक की नियुक्ति होनी है। प्रशासक बनने के बाद मुआवजा देने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रयास है कि जल्द ही परियोजना शुरू हो सके।
-राम अभिलाष, एसडीएम दुद्धी

सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

सोनभद्र के आदिवासियों के आशाओं पर खरे नहीं उतरे राहुल गांधी

सोनभद्र की धरती पर पहली बार पड़े थे राहुल के कदम
कैमूर क्षेत्र के बाशिंदों और आदिवासियों का हुआ उनके ही घर में अपमान
राहुल की जनसभा में शामिल होने गए सोनभद्र के आदिवासी शिवधार और नन्दलाल को हवालात की हवा भी खानी पड़ी।
नन्दलाल अपनी धरोहर तीर-धनुष लेकर गया था और उसकी धरोहर ही उसके लिए सजा बन गई। 

यह बात तब की है जब सोनभद्र की धरती पर पहली बार कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी आये थे उस वक्त वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग के बायीं ओर मिर्जापुर जनपद का अहरौराडीह गांव इतिहास रचने को तैयार। गांव के पास गेंहूं की फसल की कटाई के बाद खाली पड़ी करीब बीस बीघा खेत में भारी सुरक्षा के बीच  तैयार दो मंच और पंडाल। साथ ही चिलचिलाती धूप में आग के गोले बरसा रहा सूरज। मौसम का पारा भी 46 डिग्री सेल्सियस की हद को पार कर चुका था और लोगों के स्वास्थ्य को चेतावनी दे रहा था। फिर भी, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर के बाशिंदों समेत आस-पास के कांग्रेसी इकट्टा हो रहे थे। कांग्रेसियों की इस भीड़ में मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली के उपेक्षित आदिवासी भी तीर-धनुष के साथ शिरकत किए हुए थे। 

शाम के करीब साढ़े चार बजने को थे। पंडाल समेत आस-पास के इलकों में करीब साठ हजार लोगों की भीड़ भारी सुरक्षा के बीच बने मंच की ओर टकटकी लगाए हुए थे। दूसरे मंच पर कांग्रेसी नेताओं का भाषण चल रहा था। बेरिकेंडिंग के बीच बने मंच के सामने मीडियाकर्मियों की जमात अपने लाव लश्कर के साथ तैयार थे। अचानक हेलिकाप्टर की आवाज सुनाई देती है और मंच के बायीं ओर सौ मीटर की दूरी पर धुंआ उठने लगता है। सबकी निकाहें उठते धुआं की ओर पड़ती हैं और लोग आसमान की ओर नजरे टिका लेते हैं। सबकी आंखों में कुछ आशाओं के साथ एक अनोखी चमक है। लोग बदन से गिरते पसीने और चिलचिलाती धूप में जिस छड़ का इंतजार कर रहे थे, वो खड़ी आ चुकी थी। नीले रंग का एक उड़नखटोला (हेलिकाप्टर) हवामंडल में तैर रहा था, जो अचानक उनके पास बने बेरिकेडिंग में उतरने लगा। सभी लोगों की निगाहें नीले रंग के उड़नखटोले पर जा टिकी। लाउडस्पीकर से सोनिया गांधी जिंदाबाद, राहुलगांधी जिंदाबाद, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद आदि के नारे गूंजने लगे। चार बजकर चालीस मिनट पर कांग्रेस पार्टी के महासचिव और अमेठी के सांसद राहुल गांधी उड़नखटोले से बाहर आए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से परिचय करने के बाद राहुल गांधी भारी सुरक्षा के बीच बने मंच पर आसीन हुए और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। अब सबकी निगाहें राहुल गांधी की हरकतों पर टिकी थी। साथ ही साथ सभी के दिलों में राहुल गांधी से जुड़ी आशाएं हिलोरे मार रही थी।  सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के आदिवासियों समेत यहां के बाशिंदों के दिलों में ये आशाएं कुछ ज्यादा ही हिचकोले खा रही थीं, क्योंकि राहुल गांधी ने बीते साल गरीबी की हालत से बदहाल बुंदेलखंड की कलावती का दर्द लोकसभा में उठाकर पूरे विश्व का ध्यान बुंदेलखंड के पिछड़ेपन की ओर इंगित किया था। सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली की भी भौगोलिक स्थिति और समस्याएं बुंदेलखंड जैसी हैं। साथ ही ये तीनों जनपद उत्तरप्रदेश के सबसे नक्सल प्रभावित जनपदों में शुमार हैं।

करीब पांच बजे राहुल गांधी ने कांग्रेस के साथ खड़े होने और स्वागत के लिए लोगों को धन्यवाद देते हुए अपनी बात शुरू की। सबकी इंद्रियां राहुल गांधी के एक-एक शब्द को ध्यान से सुन रही थीं, लेकिन राहुल गांधी के सभी शब्दों को सुनने के बाद लोगों की सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के लिए विशेष पैकेज की आशाएं धरी की धरी रह गयी। चिलचिलाती धूप में यहां के गरीबों और किसानों को राहुल गांधी से निराशा ही हाथ लगी। यदि राहुल गांधी के भाषण पर ध्यान दें तो उन्होंने पूरे भाषण के दौरान उत्तर प्रदेश में चल रही बहुजन समाज पार्टी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए खासतौर से युवाओं का आह्वान कर कांग्रेस के मिशन 2012 का जोरदार आगाज किया। राहुल गांधी ने देश की वर्तमान राजनीति की उकरते हुए कहा कि आज हिंदुस्तान में दो विचार धाराएं हैं। यहां दो तरीकों की सरकार चलती है। एक जो पूरे हिंदुस्तान को एक आग में झोकती है। एक गृहस्ती को अपना मानकर चलती है। चाहे वो गरीब हो, अमीर हो, पिछड़ा हो, दलित हो आदिवासी हो। कांग्रेस पार्टी की सरकारें सभी को साथ लेकर चलती हैं। 

साल 2004 में दिल्ली में आपने ऐसी ही सरकार बनाई। ‘‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को पूरी दुनिया का बेहतरीन प्रोग्राम करार देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैं राज्यों में गांव गांव में जाता हूं। लोग नरेगा को सबसे बेहतर प्रोग्राम करार देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार इसे ठीक नहीं मानती है। बीते 20 सालों के दौरान उत्तर प्रदेशकी राजनीति की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा’’ आपने पहले धर्म की राजनीति देखी। भाजपा की सरकार आयी। आपने उसे हटाया। फिर जाति की सरकार आयी। सपा की सरकार आयी। आपने उसे बदला। फिर बीएसपी आयी। उसने कहा दलितों की सरकार बनेगी। मुझे दलितों की सरकार दिखाई नहीं देती। बहुजन समाज पार्टी की सरकार प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने अपने संस्मरण के माध्यम से उत्तर प्रदेश में सरकार नहीं होने की बात कही। कांग्रेस महासचिव ने आगामी विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को हराकर उत्तर प्रदेश को बदलने का आह्वान किया। उन्होंने सोनभद्र में खनीज इँडस्ट्री होने के बाद भी बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल पाने पर बीएसपी सरकार को दोषी ठहराया। साथ ही गांवों में पांच से छह घंटे बिजली आपूर्ति को लेकर बसपा को आड़े हाथों लिया। करीब बारह मिनट के अपने भाषण में राहुल गांधी ने सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के आदिवासियों, वनवासियों और गरीबों की आशाओं के अनुरूप कोई भी ऐसी घोषणा नहीं की जिससे चिलचिलाती धूप में त्वचा झुलसाने का फल यहां के बाशिंदों को मिल सके। 

राहुल गांधी को आदिवासियों की व्यथा की हालत तब भी नहीं याद आयी जब भूखमरी से 18 बच्चों की मौत का गवाह बन चुकी घसिया बस्ती (सोनभद्र) निवासी गरीब आदिवासी कतवारू ने आदिवासियों की धरोहर धनुष-तीर और टोपी उन्हें भेंट की। कतवारू के माध्यम से आदिवासियों ने अपने प्रेम और आतिथ्य का संस्कार दिखाया लेकिन उन्हें एक बार फिर कांग्रेस के युवराज से निराशा ही हाथ लगी। इतना ही नहीं, राहुल की जनसभा में शामिल होने गए सोनभद्र के आदिवासी शिवधार और नन्दलाल को हवालात की हवा भी खानी पड़ी। परसोई निवासी आदिवासी शिवधार को कुछ घंटों की पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन ओबरा थाना क्षेत्र के पनारी गांव के खाड़र टोला निवासी नन्दलाल को 24 घंटे हवालात की हवा खानी पड़ी। वरिष्ठ कांग्रेसी राजेशपति त्रिपाठी और ललितेश त्रिपाठी के कहने के बाद भी नन्दलाल को नहीं छोड़ा गया। नन्दलाल को छुड़ाने के लिए इंटक के जिलाध्यक्ष हरदेव नारायण तिवारी और छात्र नेता विजय शंकर यादव अहरौरा थाने में देर रात तक लगे रहे, लेकिन पुलिस वालों ने एक न सुनी। आखिरकार 19 मई की शाम नन्दलाल को उप जिलाधिकारी चुनार सामने बांड भरना पड़ा। तब जाकर पुलिसवालों ने नन्दलाल को छोड़ा। राहुल को देखने की आशा से नन्दलाल अपनी धरोहर तीर-धनुष लेकर गया था और उसकी धरोहर ही उसके लिए सजा बन गई। यहां तक कि उसपर नक्सली होने तक का आरोप लगाया गया।