शनिवार, 19 अप्रैल 2014

ऊर्जान्चल परिक्षेत्र के लोगो के साथ बिजली विभाग द्वारा किया जा रहा ऐतिहासिक अन्याय।

ऊर्जान्चल परिक्षेत्र जो ऊर्जा उत्पादन में विश्व में अपना अद्वितीय स्थान रखता है, यहाँ कि उत्पादित बिजली से चहुँओर उजाला एवं विकास हो रहा है, परन्तु ऊर्जान्चल के रहवासियों और यहां के विस्थापितों जिनकी कई पीढ़ीयों ने विस्थापन का दंश झेला है और अपना सर्वश्व राष्ट्रहित में ऊर्जा उत्पादन के लिये समर्पित कर दिया, उन्हीं के साथ बिजली विभाग ऐतिहासिक अन्याय कर रहा है। 

जहाँ एक ओर ऊर्जान्चल के धरती से पैदा हुई बिजली से रौशन जनपद इटावा, कन्नौज व मैनपूरी और बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति की जा रही है और बिजली बिल मात्र 445 से 517 रूपये उपभोक्ताओं से लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ऊर्जान्चल के सभी गांव में बिजली भी मयस्सर नहीं है और जिन ग्राम पंचायतों में 16 से 18 घण्टे बिजली आपूर्ति की भी जा रही है, वहां पिछले तीन सालों से ग्रामीण उपभोक्ताओं से बिजली बिल के नाम पर लूट का नया किर्तिमान बनाकर वर्तमान में 1718 रूपये बिजली बिल के नाम पर लूटा जा रहा है। 

जबकि ऊर्जान्चल के 95 प्रतिशत किसान विद्युत उत्पादन हेतु विभिन्न परियोजनाओं की स्थापना के लिये किये गये भूमि अधिग्रहण से भूमिहीन है एवं पीढ़ियों के विस्थापन के दंश के बावजूद भी उन्हें आज तक न तो बिजली की समुचित सुविधा मिल पायी है, दूसरी ओर बिजली बिल के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से चार से पाँच गुना अधिक बिजली बिल वसूली जा रही है। 

सिंगरौली परिक्षेत्र में बढ़ता जानलेवा प्रदुषण।

सिंगरौली परिक्षेत्र जो ऊर्जा उत्पादन में विश्व में जहाँ अद्वितीय स्थान रखता है, वहीं दूसरी ओर नीजि व सरकारी औद्योगिक ईकाईयों की पर्यावरण के प्रति असंवेदनशीलता ने सिंगरोली परिक्षेत्र को दुनिया का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बना दिया है। जिन जिम्मेदार संस्थाओं व अधिकारियों के जिम्मे पर्यावरण संरक्षण एवं मानवीय जीवन को संरक्षित रखने की जिम्मेवारी थी, उनके हुक्मरानों ने लाखों लोगों को प्रदूषण रूपी मौत के अन्धे खांयी में धकेल कर अपने व अपने परिवारजनों को इन नीजि संस्थाओं में अच्छे ओहदों पर नौकरियाँ दिलावायी है और करोड़ों रूपये अर्जित किये गये है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिकारिक रूप से यह आकड़े जारी किये गये है कि सिंगरौली परिक्षेत्र की हवा व पानी में देश का सर्वाधिक जहरीलस तत्व मौजूद होने के कारण यहाँ के रहवासियों में अनेकों प्रकार की गम्भीर बिमारियाँ पैदा हो रही है व आने वाली पीढ़ियों पर इसके गम्भीर दुष्परिणाम दिखायी देंगे। 

नीजि विद्युत परियोजनाओं के लिये अन्धा-धुन्ध तरीके से लाभ अर्जित करने की परम्परा से खुले मालवाहकों पर कोयले व राख के अभिवहन ने पूरे सिंगरोली परिक्षेत्र को मौत की काल-कोठरी बनाकर रख दिया है। प्रदूषण की धूल ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन व परिवहन विभाग के अधिकारियों के आँखों पर भ्रष्टाचार की मोटी परत चढ़ा दी है। जिससे उन्हें सिंगरोली परिक्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण लाखों लोगों की धीमी मौत दिखायी नहीं पड़ रही है। 

महत्वपूर्ण है कि विश्व की कई जानी-मानी संस्थाओं ने सिंगरौली परिक्षेत्र के पर्यावरण की स्थिति पर अपनी रिर्पोट में स्पष्ट किया है कि वह दिन दूर नहीं जब सिंगरोली परिक्षेत्र के लोग व्यापक प्रदूषण के कारण बे-मौत मरेंगे, जो अन्य कारणों से होने वाली मौतों से ज्यादा की संख्या में हांेगी। खैर सत्ता के शिखर पर बैठे सत्ताधीश और हुक्मरानों के पास इन सबके विषय पर सोचने का वक्त कहां है। क्योंकि उन्हें लगता है कि अकुत धन से कृत्रिम सांसे खरीदकर अपनी जिन्दगी जी ही लेंगे। 

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

विस्थापितों से हुये समझौते होंगे लागू- दारापुरी

:- विस्थापित गांवों का पूर्व आई.जी. एस.आर.दारापुरी ने किया दौरा

राबर्ट्सगंज, 26 मार्च14, पूर्व आई. जी. व आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस.आर. दारापुरी ने कहा है कि 60 के दशक में बने रिहंद जलाशय और बाद में स्थापित हुए औद्यागिक प्रतिष्ठानों से लाखों लोंगो को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। आज भी विस्थापित गवर्नमेंट ग्रांट पट्टों के सहारे उनकी जिंदगी चल रही है. भारी विस्थापन के समय सरकार ने जो समझौते किये उनका अनुपालन न कराया जाना ही विस्थापितों की दुर्दशा की प्रमुख वजह हैं।

आज आइपीएफ नेताओं के साथ म्योरपुर व बभनी ब्लाक के झीलो खमरिया, पीपरहर,डोडहर,करहिया,सीसवां झापर,चैना,घघरा,बजिया,मचबंधवां,भॅवर इत्यादि रिहंद विस्थापित गांवो का दौरा करने और कई सभाओं को संबोधित करते हुए श्री दारापुरी ने कहा कि विस्थापितों को तय मुआवजा राशि जो बेहद कम थी उसे भी पूरी तरह नहीं दिया गया, इसलिए नये आधार पर मुआवजा राशि को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खनिज संपदा से भरपूर है और कारपोरेट्स की नजर है जिससे भविष्य में भारी विस्थापन का खतरा मौजूद है। दारापुरी ने डोडहर गाँव के लोगों का पुलिस द्वारा उत्पीड़न करने की कड़ी निंदा की और उन की बैठक में उन्हें आश्वस्त किया कि उन के सवाल हर हाल में हल कराये जायेंगे। इन विस्थापित गांवों के हजारों लोगो ने दारापुरी जी से आग्रह किया किया कि विस्थापितों की आवाज को संसद तक पहुँचाने के लिए इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करें क्योकि आज तक किसी जन प्रतिनिधि ने विस्थापितों के मुददों को संसद में नही उठाया है।

श्री दारापुरी ने विस्थापितों को आश्वस्त किया कि उनके सवालों को आइपीएफ हर स्तर पर संघर्ष करेगा और विस्थापितों के साथ अन्याय नही होने दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से पूरे देश के लिए बिजली का उत्पादन होता है वहां के गांवो में आज भी बिजली नहीं है और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधओं का अभाव है।

गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

मीटर लग गए पर स्कूलों में बिजली नहीं आई

सिटिजन जर्नलिस्ट जुल्फिकार हैदर खान ने अपनी पड़ताल में सोनभद्र में शिक्षा विभाग की कारगुजारियों के बारे में खुलासा किया।

विकास ने खोली चैक डैम में हुए फर्जीवाड़े की पोल

गांव और गरीबों के विकास के लिये सरकार करोड़ों रुपए जारी करती है। लेकिन सरकारी अमला इसमें फर्जीवाड़ा कर रकम डकार जाता है।

किलर रोड की तस्वीर बदलकर रहेंगे पंकज

आईबीएन-7 | Jun 28, 2010 at 03:13pm | Updated Jul 21, 2010 at 05:05pm



सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इस जिले की सड़क मौत की सड़क बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस हाईवे को किलर रोड नाम दिया है। 2007 से 2009 के बीच यहां हुई सड़क दुर्घटनाओं में 540 लोग मारे गए। 2010 में अब तक 117 लोग मारे जा चुके हैं। सिटीजन जर्नलिस्ट पंकज मिश्रा का संघर्ष उस अव्यवस्था के खिलाफ है जो सोनभद्र की सड़कों पर मौत और विकलांगता बांट रही है। उनकी रिपोर्ट देखने के लिए वीडियो देखें।

महेंद्र ने छेड़ी गंदे पानी के खिलाफ मुहिम

 | May 27, 2010 at 04:18pm | Updated May 28, 2010 at 06:51pm


उनकी 24 साल की इकलौती बेटी रानी ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं।
सोनभद्र। 
सोनभद्र जिले के महेंद्र अग्रवाल पिछले 20 साल से पानी में फैले जहर को खत्म करने की मुहिम छेड़े हुए हैं। गंदे पानी की वजह से उनकी 24 साल की इकलौती बेटी रानी ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। उसे पीलिया हो गया था। नवंबर में गांव के एक दर्जन से भी ज्यादा लोग मारे गए।

महेंद्र अग्रवाल का संघर्ष पानी में घुले उस जहर के खिलाफ है जो यहां के लोगों के लिए बीमारी और मौत की वजह बन रहा है। सोनभद्र जिले में लोग भूमिगत पानी पर निर्भर हैं। गर्मियों के मौसम में भूमिगत पानी का स्तर नीचे होने पर लोग रिहंद डैम का पानी इस्तेमाल करने लगते हैं।  यहां के ग्रामीण इलाकों में लोग जो पानी इस्तेमाल कर रहे हैं वो पीने लायक नहीं है। कई संस्थाएं यहां के पानी की जांच कर इसमें जहर की मौजूदगी पा चुकी हैं। पीने के पानी में फ्लोराइट की मात्रा 1 एमजी प्रति लीटर होनी चाहिए जबकि ये यहां 7 एमजी प्रति लीटर है। पारे की मात्रा .001 एमजी प्रति लीटर होना चाहिये पर ये .005 है। यानी सभी केमिकल सामान्य से कई गुना ज्यादा हैं।

लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए महेंद्र गांव-गांव का दौरा करते हैं। हर घर में जाकर साफ पानी के अधिकार के बारे में बताते हैं। जनसुनवाइयों में लोगों की बात रखते हैं। 2005 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की। कोर्ट ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को निर्देश दिए। लेकिन हालात नहीं बदले। पानी जैसी बुनियादी जरूरत पूरी हो सके इसलिए महेंद्र ने जिला प्रशासन, संबंधित विभागों के अधिकारियों से लेकर प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति तक से गुहार लगाई है। मानवाधिकार आयोग ने उनके आवेदन पर जांच के आदेश भी दिए लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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शिक्षा की अलख जगाना जिंदगी का मकसद बना

 | Jul 28, 2010 at 03:40pm



सोनभद्र। सरकार ने भले ही शिक्षा के अधिकार का कानून बनाया हो लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने शिक्षा देना और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना अपनी जिंदगी का मकसद बना रखा है। सिटिजन जर्नलिस्ट अशोक चंद्रवंशी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं। जिन्होंने अपने आपको शिक्षा के प्रति पूरी तरह समर्पित कर दिया है। वो दस साल से शिक्षा की अलख जगाने की कोशिश में जुटे हैं। कैसी है उनकी कोशिश ये जानने के लिए वीडियो देखें।




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पेड़ों को मरहम लगाते हैं हरि किशन

 | Nov 07, 2008 at 05:22pm



सोनभद्र। हरि किशन सोनभद्र जिले के नगवा गांव के रहने वाले हैं। उनकी मेहनत से एक वीरान जंगल दस साल की मेहनत के बाद अब हरा भरा हो गया है।

गांव के लोगों के लिए लकड़ी एक बुनियादी जरूरत है। चाहे वो घर के लिए हो, खाना बनाने के लिए, दाह संस्कार के लिए या फिर दूसरी जरूरतों के लिए। इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए आज से दस साल पहले एक जंगल की कटाई शुरू हुई। भारी संख्या में पेड़ काटे जाने लगे और जंगल वीरान हो गए।

हरि किशन इस जंगल को दोबारा जीवित करने के लिए कुछ करना चाहते थे लेकिन पैसे की कमी के कारण वो नए पेड़ नहीं लगा सकते थे। पर फिर भी उन्होंने इन पेड़ों को बचाने के लिए कुछ करना चाहा। पूर्वजों से विरासत में मिली मरहम लगाने की तरकीब ने कटे पेड़ों को हरा भरा बनाने में उनका साथ दिया। और दस सालों की मेहनत का नतीजा है कि इस जंगल में करीब दस लाख पेड़ जीवित हो गए हैं।

जिस लेप को किशन इन पेड़ों के घावों में लगाते हैं वो नीम, गोबर, हठ जोड़, गोमूत्र, मदर का पत्ता और मुलतानी मिट्टी का लेप होता है। उन्होंने इस जंगल का नाम ‘जनता जंगल’ रखा क्योंकि इस जंगल को बचाने में गांव वालों ने उनका पूरा साथ दिया। इस जंगल में एक भी पेड़ बाहर से नहीं लगाया गया है। कटे हुए तने से पेड़ों को दोबारा जीवित किया गया है।

जंगल बसने के बाद समस्या थी उसकी रखवाली की। सबने जंगल को चार भागों में बांटा और चार समितियां बनायीं जो कि जंगल की देख-रेख करती हैं। पेड़ काटने वालों को सामाजिक और आर्थिक सजा दी जाती है। आज एकबार फिर जंगल में वो जड़ी बूटियां मौजूद हैं जो आदिवासियों के जीवन का अहम हिस्सा हैं।
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सोनभद्र में भीड़ के हमले से 3 पुलिसवाले घायल

 | Jan 25, 2011 at 01:23pm


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक युवक की कथित हत्या से उत्तेजित लोगों के हिंसक प्रदर्शन और पथराव से तीन पुलिसकर्मी घायल हो गये। घटना जिले के कोन इलाके की है। 30 साल के स्थानीय युवक अजय कुमार की मौत से नाराज लोग सोमवार देर रात से यहां हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। युवक का शव रविवार को रोरवान लौंगा गांव के समीप से बरामद किया गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक कुमार कुछ दिन पहले अपनी ससुराल रोरवान लौंगा गया था। उसका शव ससुराल से कुछ ही दूरी पर पाया गया। स्थानीय लोग पुलिस को शव न सौंपकर ससुरालवालों पर कुमार की हत्या का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे।

सोमवार रात जब पुलिस अधिकारी गांव के लोगों को यह समझाने गए कि कुमार की हत्या नहीं की गई बल्कि उसकी मौत एक हादसे में हुई। इस पर भीड़ हिंसक हो उठी और उसने पुलिस अधिकारियों पर पथराव कर उनकी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। भीड़ ने पुलिस के वाहनों में आगजनी की भी कोशिश की।

जिले के पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को चारों तरफ से घेर लिया था। सूचना मिलने पर जब अन्य थानों से पुलिस बल मौके पर पहुंचा तब हालात पर काबू पाया जा सका। पथराव में एक पुलिस उपाधीक्षक सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।
कुमार ने कहा कि हालात नियंत्रण में लेकिन तनावपूर्ण हैं। तनाव के मद्देनजर प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) और पुलिसबल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर डेरा डाले हुए हैं।
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सोनभद्रः 80 साल की वृद्धा से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

 | Oct 04, 2010 at 01:33pm


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में 80 साल की बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म के आरोपी युवक सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। घटना जिले के म्योरपुर इलाके के दिवारी गांव की है, जहां 27 साल के श्यामलाल ने कथित तौर पर रविवार शाम गांव की ही एक बुजुर्ग महिला फूलसखी (परिवर्तित नाम) के साथ दुष्कर्म किया और फिर फरार हो गया।

म्योरपुर चौकी प्रभारी पी. पी. सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया बुजुर्ग महिला रविवार शाम जंगल के पास अपने खेत गई थी, इसी दौरान वहां से गुजर रहा श्यामलाल पीड़िता को उठाकर जंगल ले गया और मारपीट कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

उन्होंने बताया कि घायल बुजुर्ग महिला का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद से महिला काफी सदमे में है। सिंह ने बताया कि फरार आरोपी श्यामलाल को आज गिरफ्तार कर लिया गया। उसने पूछताछ में बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म और मारपीट की बात कबूल कर ली है।
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गरीबों के कल्याण के नाम पर भ्रष्टाचारियों का कल्याण


आईबीएन-7 | Dec 30, 2011 at 05:58pm

सोनभद्र। सोनभद्र में डैम बनाने के आड़ में आम आदमी के पैसे की खुलकर लूट खसोट हो रही है। सिटिजन जर्नलिस्ट अश्विनी सिंह ने खुलासा किया कि सोनभद्र में पब्लिक फंड के करोड़ों रुपए शासन और प्रशासन मिलकर लूट रहा है।

दरअसल सोनभद्र जिले की दूधी तहसील में कन्हर डैम परियोजना का काम शुरू हुआ है। इस डैम के निर्माण से सोनभद्र जिले के 11 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे। लगभग 652 करोड़ रुपए की इस योजना की आड़ में सरकारी अमला योजनाबद्ध तरीके से लूट खसोट रहा है। किसी भी सिंचाई परियोजना के शुरू होने पर डूब क्षेत्र में किसी भी निर्माण को मंजूरी नहीं दी जाती है ना ही पुराने कार्यों को जारी रखा जाता है, लेकिन कन्हर डैम परियोजना में दर्जनों बडे़ प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
यहां के पगन नदी पर 2 करोड़ की लागत से 200 मीटर लंबा पुल बनाया जा रहा है। कन्हर डैम परियोजना की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक ये पुल कन्हर डैम परियोजना के डूब इलाके में है। कन्हर डैम परियोजना 1976 में शुरू की गई थी जिस पर 27 करोड़ की लागत आनी थी कई साल परियोजना पर काम चला और लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च भी हुए लेकिन फिर यह परियोजना अधूरी छोड़ दी गई। लेकिन डूब क्षेत्र में आने वाले इलाके के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी गईं। और अब फिर से ये योजना शुरू होने पर डूब क्षेत्र में विकास के नाम पर पैसा खर्च किया जा रहा है।

पैसों के दुरुपयोग के बारे में अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सभी लोग जानते हैं। लेकिन इस बर्बादी को रोकने की कोई पहल नहीं कर रहा है। सवाल ये है आखिर क्यों। इस पूरे मामले में प्रशासन क्या करने वाला है इस पर कलेक्टर ने कहा कि हम लोग टर्म वाले काम बंद करेंगे और लेकिन शॉर्ट टर्म वाले विकास जारी रहेंगे।
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आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने की अभय की मुहिम

 | Sep 01, 2009 at 03:27pm



सोनभद्र। दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलती दुनियां में हम पुरानी परम्पराएं, अपनी सभ्यता, संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए हम साफ हवा, पानी, छांव देने वाली प्रकृति की अनदेखी करने लगे हैं और जो संताने इसकी गोद में पल रही हैं हम उनको ही उनके अधिकारों से दूर कर रहे हैं।

बात हो रही है सोनभद्र के उन आदिवासियों की जो सालों से अपने जंगल को बचाने और उस पर मालिकाना हक पाने के लिए सालों से लड़ रहे हैं। अभय सिंह सोनभद्र के दुद्धी के रहने वाले हैं। उनकी लड़ाई है उन आदिवासियों के लिए जो अपनी परम्परागत भूमि पर मालिकाना हक पाने के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनकी ज़मीन सरकार ने उनसे छीन ली है। जब भी आदिवासियों की ज़मीन का मुद्दा उठता है प्रशासन एक नया आश्वासन दे देता है। अभय इसी मुद्दे को लेकर एसडीएम से मिलने पहुंचे। उन्हें फिर एक और आश्वासन मिल गया। दरअसल प्रशासनिक अधिकारियों को एहसास ही नहीं है कि जिन हज़ारों आदिवासियों से उनकी ज़मीन छीन ली गई है वे किस तरह जीवन बिता रहे हैं।

जंगल और पहाड़ों से घिरे उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिल में करीब 14 लाख की आबादी है। इस इलाके में आधे से ज्यादा लोग आदिवासी हैं। इनकी रोजी रोटी का जरिया है जंगल। ज्यादातर आदिवासी झूम खेती करते हैं यानी कुछ साल एक स्थान पर खेती करने के बाद दूसरी जगह जाकर खेती करना ताकी ज़मीन की उर्वरकता बनी रहे। ऐसे वे सदियों से करते आ रहे हैं। इन आदिवासियों की दिक्कत तब शुरू हुई जब 1980 में केन्द्र सरकार ने देश भर में वन अधिनियम लागू किया। इससे पहले कि आदिवासियों को इस अधिनियम के बारे में बताया या समझाया जाता अधिनियम के तहत उन्हें जंगल से बाहर कर दिया गया। उनके जो खेत खलिहान थे उस पर वन विभाग का कब्जा हो गया। अनपढ़ और सीधे साधे आदिवासियों की समझ में ही नहीं आया कि अचानक ये क्या हो गया।

ज़मीन और झोपड़ियां छिन जान के बाद दर बदर होकर भिखारियों से बदतर ज़िंदगी गुज़ार रहे आदिवासियों को उनका हक़ दिलाने के लिये बनवासी सेवा आश्रम नाम की संस्था ने वन अधिनियम के खिलाफ 1985 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली जिस पर कोर्ट ने नए सिरे से सर्वे कर जमीन पर आदिवासियों को अधिकार देने का आदेश दिया। लेकिन ये आदेश आदिवासियों के लिए एक नई मुश्किल बन गया। कोर्ट के इस आदेश की आड़ में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देकर उन बाहरी लोगों ने जिनका कभी इस जंगल से वास्ता नहीं था। आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया।

आदिवासियों ने इस ज़्यादती के खिलाफ़ संगठित हो कर आवाज़ उठायी तो केन्द्र सरकार ने दिसम्बर 2006 में अनुसूचित जनजाति और अन्य पारम्परिक वनवासी अधिनियम पारित किया। इसके तहत आदिवासियों को उनके जंगल में जमीन का हक मिलेगा। इसके अलावा जो आदिवासी नहीं हैं लेकिन 75 सालों से जंगल में रह रहे हैं उनको भी जमीन पर कब्जा मिलेगा। इस काम के लिये 4 कमेटियां बनाई गई। लेकिन जब अभय ने सूचना के अधिकार के तहत कमेटी की सूची मांगी तो ये जानकर आश्चर्य हुआ कि बिना गांव के लोगों को शामिल किए इन कमेटियों का गठन कर दिया। जिन लोगों को इन कमेटियों का पदाधिकारी बताया गया था उनको ही इस बात की जानकारी नहीं थी कि वो इसके सदस्य हैं।

जब अभय कुछ गांव वालों को इकठ्ठा कर मामले को अफसरों के सामने ले गए तो अक्टूबर 2008 में नए सिरे से नई ग्राम स्तर की कमेटी गठन करने का आदेश हुआ। कमेटी के सामने लगभग 55 हज़ार लोगों ने अपने दावे पेश किये। ये दावे आज तक कमेटी के दफ़्तर में धूल खा रहे हैं लेकिन एक भी दावेदार को जांच के बाद जमीन का पट्टा नहीं मिला है। इस तरह कल तक जो आदिवासी जल-जंगल-जमीन के मालिक थे आज दर बदर हैं। लेकिन ऐसा अधिक दिनों तक नहीं चल सकता। प्रशासन कितनी भी गहरी नींद में क्यों ना सो जाए अभय उसे जगा कर ही दम लेंगे।

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सोनभद्र में करोड़ों के खर्च के बावजूद नहीं पहुंचा पानी

आईबीएन-7 | Aug 26, 2012 at 08:30pm | Updated Aug 29, 2012 at 03:01pm
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सरकार ने पानी की व्यवस्था करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन नतीजा जस का तस रहा है। यहां के लोगों तक पानी पहुंचा ही नहीं है। आईबीएन-7 के सिटिजन जर्नलिस्ट सोनभद्र निवासी अमित बता रहे हैं कि सोनभद्र में अधिकारियों ने सिंचाई योजना की आड़ में किस कदर लूट मचाई है।
सोनभद्र के गांव हर साल पानी की भारी कमी से जूझते हैं। गर्मी में कई गांव के हैंडपंप सूख जाते है और हालात ऐसे हो जाते है कि महिलाओं को पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस इलाके में पेयजल और सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2009 में एक योजना शुरू की गई थी।

योजना के तहत यहां बहने वाली पांडू नदी पर 23 चैकडैम बनाने का काम शुरू किया गया। काम 3 महीनों में यानी 30 जून 2009 तक पूरा कर लिया जाना था। आज चैकडैम के निर्माण की योजना शुरू हुए 3 साल बीत चुके हैं। सिटिजन जर्नलिस्ट अमित ने कई गांवों के चैकडैम का मुआयना किया।

कोन गांव का घगिया इलाके में बने चैक डैम के निर्माण में इतनी घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया गया कि वो पहली बरसात भी नही झेल पाया और धाराशायी हो गया। यहां के मजदूरों का कहना है कि उन्होंने ठेकेदार से कहा लेकिन ठेकेदार ने अच्छा माल नहीं लगाया। इस योजना से 12 गांव के लोगों को पानी की किल्लत से राहत मिलनी थी लेकिन ये चैकडैम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं।

किशनपुरवा गांव के इलाके में भी मिली जानकारी के मुताबिक एक चैकडैम बनना था लेकिन वहां चैकडैम नजर ही नहीं आ रहा। किशनपुरवा गांव में चैकडैम बनना तो शुरू हुआ, लेकिन गढ्ढा खोदकर छोड़ दिया गया और इस काम में लगाए गए सैकड़ों मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दी गई। गांव के सरपंच ने बताया कि तीन चैकडैम बनने थे लेकिन एक भी नहीं बना। मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दी गई। रोरवा गांव इलाके में भी चैकडैम बनाना शुरू किया गया था। 3 साल में काम एक चौथाई ही हो पाया है। आधे अधूरे काम से पैसे भी बर्बाद हुए और नतीजा भी कुछ नहीं निकला।

सिटिजन जर्नलिस्ट ने जो तहकीकात की उसमें पाया कि 3 महीनों में बनने वाले चैकडैम 3 साल में भी नही बन पाए है। 23 में 3-4 चैकडैम ही बने है जो पूरी तरह कारगर नहीं हैं, 12-13 चैकडैम आधे अधूरे हैं और बाकी का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है। चैकडैम के निर्माण में हो रही गड़बड़ियो को रोकने के लिए अमित काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं और इसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

लघु सिंचाई विभाग के इंजीनियर भी इस बारे में कुछ बोलने को राजी नहीं है ना ही उनकी आरटीआई का जवाब दे रहे हैं। जानकारी मांगने पर उनका कहना है कि इस काम की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जा सकती। जबकि आरटीआई विशेषज्ञों का कहना है कि ये सूचना देना पब्लिक इंट्रेस्ट में जायज है।

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भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर दो बार हुए जानलेवा हमले



आईबीएन-7 | Jan 04, 2012 at 05:39pm

सोनभद्र। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सबसे बड़ी ताकत हिम्मत होती है। ऐसी ही व्यवस्था के सामने डट कर खड़े हैं सोनभद्र से सिटिज़न जर्नलिस्ट डॉ. अमरनाथ देव पांडे। उनपर दो बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। लेकिन वो जान की परवाह किए बिना भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को जारी रखे हुए हैं।
अमरनाथ देव पांडे पर 20 और 26 जनवरी 2010 को जानलेवा हमले हुए। इसकी वजह ये थी कि उन्होंने अपने गांव में महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के तहत हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। लेकिन उनके प्रयासों को हमलावर रोक नहीं सके और उनकी कोशिशों का नतीजा था कि यहां केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य क्वॉलिटी मॉनिटर की अध्यक्षता में जांच के लिए समितियां आई। दोनों समितियों ने जांच में पाया कि मनरेगा के तहत सोनभद्र में एक साल में 250 करोड़ खर्च किए गए हैं जिसमें भारी अनियमितताएं हुई हैं। जांच समितियों ने हेराफेरी में कई लोगों को दोषी पाया और उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने और उनसे लाखों रुपए का धन वसूलने का प्रस्ताव रखा। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश ग्राम विकास आयुक्त ने जिलाधिकारी को चिट्टी लिखकर दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ़ तुरंत कार्रवाई का निर्देश दिया। इस मामले में अभी जांच चल रही है।

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सपा से कांग्रेस में आए उम्मीदवार का पर्चा हो गया खारिज

 | Jan 30, 2012 at 06:24pm | Updated Jan 30, 2012 at 06:46pm


लखनऊ। उत्तरप्रदेश चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। उसके एक मजबूत समझे जा रहे उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है। इस प्रत्याशी के लिए राहुल गांधी ने भी रैली की थी। सात बार विधायक रह चुके विजय सिंह गौड़ हाल ही में सपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे। गौड़ ने सोनभद्र जिले के दुद्धि से पर्चा भरा था।

विजय सिंह गौड़ सात बार के विधायक रहे हैं। इस चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था। लेकिन गौड़ ने सपा से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने भी उन्हें अपने टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए आगे कर दिया।

विजय सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करने खुद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी रैली की लेकिन सारे राजनीतिक पैंतरे उस समय फेल हो गए जब नामांकन पत्र की जांच के दौरान विजय सिंह गौड़ का पर्चा खारिज हो गया। विजय सिंह के साथ-साथ ये कांग्रेस के लिए भी एक बड़ा झटका है।
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चकबंदी योजना के नाम पर किसानों से धोखाधड़ी

 | Jan 10, 2013 at 07:01pm



सोनभद्र। किसानों को राहत पहुंचाने की नीयत से लागू की गई चकबंदी योजना ने सैकड़ों किसानों जिंदगी बर्बाद कर दी है। सोनभद्र रहने वाले शांति प्रकाश बता रहे हैं कि किस तरह उनके इलाके में चकबंदी के नाम पर सैकड़ों किसानों का वो हाल कर दिया गया कि किसान दर-दर भटक रहे हैं।

दरअसल सोनभद्र के परसौना गांव के सैकड़ों किसानों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकारी रिकार्ड में इन्हें मरा हुआ दिखाकर इनकी जमीन इनसे छीनी जा रही है। सिटिजन जर्नलिस्ट शांति प्रकाश इन लोगों को हक दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। सरकार ने 1995 में परसौना गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू की थी। मकसद था गांव की जमीन को पुनर्नियोजित करना जिससे किसानों की टुकड़ों में बंटी जमीन को एक चक के रूप में उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन परसौना गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान काफी गड़बड़िया हुई।

विभागीय साठ-गांठ के चलते गांव के कुछ दबंग और प्रभावशाली लोगों ने मनमाने ढंग से अच्छे चक अपने नाम करा लिए हैं और मूल काश्तकार को जंगल में बेकार जमीन दे दी गई है। चकबंदी के बाद कई किसानों की भूमि घट रही है तो कुछ लोगों ने भूमि बढ़ाकर पैमाइश करा ली है। गांव के कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रिकार्ड में मृत दर्शाकर उनकी जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। चकबंदी में हुई गड़बड़ियों को ठीक करवाने के लिए परसौना गांव के किसान लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

किसानों के लिए आवाज उठाने पर सिटिजन जर्नलिस्ट को गड़बड़ी करने वालों की तरफ से धमकियां मिलने लगी। दो बार जानलेवा हमले भी हुए जिसकी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। यहीं नहीं, झूठे केस में फंसाने की कोशिश भी चल रही है। लगातार संघर्ष का नतीजा ये रहा कि इस पूरे मामले की जांच पूर्व जिलाधिकारी ने करवाई जिसमें गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने चकबंदी निरस्त किए जाने की संस्तुती भी की। लेकिन काफी वक्त बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन जिलाधिकारी का तबादला हो जाने के बाद आए जिलाधिकारी ने भी न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
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सात साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या


वार्ता | Jan 11, 2013 at 10:08pm

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के विण्डमगंज क्षेत्र में गुरुवार की रात एक व्यक्ति ने सात साल की बालिका के साथ बलात्कार किया। बलात्कार करने के बलात्कारी ने बालिका की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि विण्डमगंज क्षेत्र के हरपुर गांव में शहजाद नामक युवक ने सात साल की बालिका को खेत में ले जाकर बलात्कार किया और भेद खुलने के डर से उसकी हत्या कर दी। इस सिलसिले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

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मनरेगा में हुई लाखों की धांधली का ऐसे हुआ पर्दाफाश

आईबीएन-7 | Aug 07, 2013 at 04:08pm | Updated Aug 07, 2013 at 04:18 pm (संकलन)


सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रहने वाले सिटिज़न जर्नलिस्ट प्रमोद चौबे बता रहे हैं कैसे मनरेगा के नाम पर कुछ भ्रष्ट लोगों ने ना सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगया, बल्कि गरीब मजदूरों का पैसा भी हड़प गए। सिटिजन जर्नलिस्ट प्रमोद चौबे एक किसान हैं और सोनभद्र के गोहणा गांव का रहते हैं। प्रमोद चौबे गांव में मनरेगा के तहत तालाब बनाने के नाम पर किस तरह सरकारी पैसे का दुर्उपयोग किया गया ये बताना चाहता हैं।

गोहणा गांव के पास एक नाला बहता है जिसे महदानी नाला कहते हैं। इस नाले पर (2003 साल) में भूमि संरक्षण विभाग ने एक चैक डैम बनाया था। जिससे यहां पानी इकट्टठा हो और लोग अपने खेतों की सिंचाई और पीने के पानी की जरूरत पूरा कर सके। चैक डैम से यहां काफी पानी इकट्ठा था। यहां पहले से बंधी होने के बावजूद साल 2010 में तात्कालीन प्रधान ने यहां मरनेगा के तहत तालाब बनाने की योजना बनाई और इसकी स्वीकृती ले ली। यहां तालाब बनाने का कोई औचित्य ही नहीं था क्योकि यहां तो पहले ही बंधी में पानी इकट्ठा था। इस काम की स्वीकृती ग्राम प्रधान के मांग पत्र पर दी गई। नियम के मुताबिक मांग पत्र पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एंव तकनीकी सहायक के हस्ताक्षर नही कराए गए। यहां तालाब बनाए जाने की जरूरत है या नहीं, ये किसी अधिकारी ने आकर जांच भी नहीं की और काम शुरू कर दिया गया। जिसमें कई गडंबडियां हुई। 

रामदास का कहना है कि परियोजना की जगह पर पुरानी बंधी थी। जिसमें दोनों तरफ बोल्डर की पिचिंग थी, उसमें से बोल्डर को उखाड़कर पूर्व प्रधान ने किसी दूसरी परियोजना में इस्तेमाल कर लिए। मौके पर इनलेट और आउटलेट का निर्माण मानक के मुताबिक न करा कर बिलकुल औचित्यहीन तरीके से कराया गया। तालाब के आउटलेट वाले किनारे के पास जेसीबी से पुरानी बंधी को काट दिया गया है। जिससे तालाब से उपयोगी पानी बेकार में बह जाएगा।

मनरेगा का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए होता है। लेकिन यहां लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। दरअसल तात्कालीन प्रधान ने जेसीबी मशीन से नाले के दो किनारों से मिट्टी उठवाकर एक तरफ डलवा दी। जिससे नाला एक चौकोर तालाब की शक्ल का हो गया। इसके बाद मजदूरों का फर्जी मस्टर रोल बनाकर 7 लाख 84 हजार रुपये की किश्त निकाल ली। यहां जेसीबी से काम किया गया। फिर सिर्फ दो हफ्ते ही मजदूरों को काम दिया गया। यहां जिन मजदूरों ने काम किया है उन्हें पैसे का भुगतान अभी तक नही किया गया है। मजदूर शंभू ने कहा कि मैंने परियोजना में एक हफ्ते काम किया, लेकिन मजदूरी नहीं दी गई। जब मजदूरी मांगते है तो कहते है कि मिल जाएगी। कब मिलेगी। हमारे जॉबकार्ड में मनमाने तरीके से प्रधान लिख देते हैं और मजदूरी भेज दी जाती है। और फिर गांव पर ही विड्रॉल फॉर्म हस्ताक्षर कराकर बैंक से धनराशी निकाल ली जाती है। 

हमने यहां हुई गडबड़ियो की शिकायत खंड विकास अधिकारी और जिला प्रशासन में की। कई बार संबंधित अधिकारियों और जिला कलेक्टर से भी इस सिलसिलें में मुलाकात भी की। काफी जद्दोजहद के बाद यहां विकास खंड़ बभनी से जांच कराई गई। और उन्होंने भी तालाब के औचित्यहीन होने और गड़बड़ियों के बारे में अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया। अधिकारी की रिपोर्ट में लिखा है की बैंक को भेजी गई मजदूरों की सूची में कहीं भी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है। इस परियोजना के मस्टर रोल पर जिस व्यकित के हस्ताक्षर है, उसने लगभग 100-100 मजदूरों की हाजिरी अकेले दर्ज की है और पूरे काम पर कोई भी मजदूर किसी भी दिन अनुपस्थित नहीं हुआ है। इससे साफ है मस्टर रोल भरने में गड़बड़ी की गई है।

रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि लोगों के पास बैंक की पासबुकों को देखने से साफ हुआ कि बैंक भी इस साजिश में सम्मिलित प्रतीत होता है, क्योंकि पासबुकों में जमा धनराशी और निकाली गई घनराशी का विवरण साफ नहीं है। जिससे लाभार्थी यह नहीं जान पाते कि उनके खाते में कितना धन आया और कितना निकाल गया। रिपोर्ट में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद भी आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे मामलों में जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है और पैसे वापस लेने की कार्रवाई की जाती है। जांच की रिपोर्ट जस की तस खंड विकास अधिकारी के पास पड़ी है।

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मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

पूरे प्रदेश में एक समान बिजली न दिये जाने पर हाई-कोर्ट ने प्रमुख सचिव ऊर्जा सहित अन्य को किया तलब

  • ः बिजली के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर हाई-कोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस।
  • ः पूर¢ प्रदेश में एक समान बिजली आपूर्ति न किये जाने से नाराज उच्च न्यायालय ने  अख्तियार किया कड़ा रूख। 
  • ः सोनभद्र सहित प्रदेश क¢ अन्य जनपदों को बेहतर बिजली मिलने क¢ जगे आसार। 
  • ः जनपद में हजारा¢ं लोगों ने बिजली बिल व 24 घण्टें बिजली क¢ लिए छ¢ड़ा था सत्याग्रह आन्दोलन। 
  • ः लोक सभा चुनाव में राबर्टसगंज सहित प्रदेश क¢ अन्य लोक सभा क्षेत्रों में भी गरमायेगा बिजली का मुद्दा।
इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने पूर¢ प्रदेश में एक समान विद्युत आपूर्ति किये जाने क¢ अपने आदेश क¢ बावजूद भी सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह व अखिलेश यादव मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश क¢ प्र्रिय जनपदों इटावा, कन्नौज, मैनपुरी व रामपुर क¢ उपभोक्ताओं को चैबिसों घण्टा विद्युत आपूर्ति किये जाने तथा प्रदेश क¢ सोनभद्र सहित अन्य जनपदों को 1 से 16 घण्टे बिजली आपूर्ति किये जाने पर संजय अग्रवाल (आइ्रएएस), प्रमुख सचिव ऊर्जा, कामरान रिजवीं (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, यूपीअीसीए, ए.पी. मिश्रा (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, पूर्वान्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, विजय विश्वास पंत (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, पष्चिमान्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटड, प्रभू नाथ सिंह (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, दक्षिणांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड को अवमानना नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया हे कि एक माह क¢ भीतर प्रदेश क¢ अन्य जनपदों की तरह तथाकथित  वीवीआइ्रपी जनपदों इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, रामपुर, सम्भल में भी समान एकरूपता में विद्युत आपूर्ति सुनिष्चित किये जाने के आदेश क¢ अनुपालन का शपथ पत्र दाखिल करें आदेश का अनुपालन एक माह क¢ भीतर न हा¢ने पर अगली सुनवाइ्र की तिथि 08 मई, 2014 को संजय अग्रवाल (आइ्रएएस), प्रमुख सचिव ऊर्जा, कामरान रिजवीं (आइ्रएएस), प्रबनध निदेशक, यूपीअीसीए, ए.पी. मिश्रा (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, पूर्वन्चल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, विजय विश्वास पंत (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, पष्चिमांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड, प्रभूनाथ सिंह (आइ्रएएस), प्रबन्ध निदेशक, दक्षिणांचल विद्युत वितरण वितरण निगम लिमिटेड को व्यक्तिगत रूप से न्यायालयल क¢ समक्ष हाजिर हा¢ने का आदेश शुक्रवार को एक अवमानना पर सुनवाइ्र क¢ बाद दिया हैं

अवमानना याचिका अनपरा, सोनभद्र क¢ सामाजिक काय्रकता्र पंकज मिश्रा द्वारा 05 जुलाई, 2013 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या-34342 आॅफ 2013 में पारित आदेष जिसमे उत्तर प्रदेश क¢ कुछ तथाकथित  वीवीआइ्रपी जनपदों इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, रामपुर, सम्भल, रायबर¢ली, अमेठी क¢ उपभोकताओं को 24 घण्टे बिजली और प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में 1 से 16 घण्टे बिजली आपूर्ति किये जाने को न्यायालय ने राज्य सरकार का मनमाना पूर्ण व गलत रवैया करार देते हुए प्रदेश क¢ समस्त उपभोकताओं को तत्काल समान रूप से बिजली आर्पूिर्त किये जाने का आदेश दिया था, न्यायालय क¢ आदेश क¢ बावजूद भी जनपद इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, झींझक, रसूलाबाद, कन्चैसी नगर, (जनपद कानपुर देहात), सम्भल, सिरसी नगर (जनपदभीमनगर), रामपुर नगर तथा विधूना नगर (जनपद औरैया) को निर्बाध्य रूप से 24 घण्टे बिजली आपूर्ति की जा रही हे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में न्यायालय क¢ आदेश क¢ बावजूद भी तथाकथित  वीवीआइ्रपी जिलों क¢ समान बिजली आपूर्ति नहीं की जा रही हैंयाचिका में इसी आदेश की अवह¢लना पर सम्बन्धितों क¢ विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही ह¢तु याचना की गई है और प्रदेश क¢ अन्य जनपदों को भी तथाकथित वीवीआइ्रपी जिलों क¢ समान बिजली आपूर्ति की मांग की गई हैं

याचिकाकर्ता क¢ अधिवकता का पक्ष सुनने क¢ बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आदेश की अवमानना माना हैं जिसक¢ बाबत न्यायालय ने सख्त रूप अख्तियार करते हुए यह आदेश दिया कि 05 जुलाई, 2013 को इलाहाबाद हाई-कोर्ट द्वारा पारित आदेश का एक माह क¢ भीतर अनुपान सुनिüिचत किये जाने का शपाि पत्र दाखि नहीं किया जाता हे तो सòी प्रतिवादीगण अगली सुनवाइ्र की तारिख में न्यायालय क¢ समक्ष व्यक्तिगत उपस्थित हा¢। ऐसा नहीं करने पर सम्बन्धितों क¢ विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही की जायेगीं 

महत्वपूर्ण है कि याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय क¢ समक्ष पूर्व में दाखिल जनहित याचिका संख्या-12530 आॅफ 2014 सहयोग सोसाइटी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य में इस बात को गम्भीरता से उठाया गया था कि जनपद-सोनभद्र जो प्रदेश को 1 हजार मेगावाट बिजली देता है और सोनभद्र क¢ 6 लाख से अधिक लोगों का विस्थापन तीन दशक पूर्व बिजली उत्पादन क¢ लिए हुआ है और जनपद बिजली उत्पादन क¢ कारण भारत का सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र बन गया है दूसरी ओर सोनभद्र क¢ उपभोक्ताओं को 10 से 16 घण्टे बिजली तथाकथित  वीआइ्रपी जनपदों से चार गुना महंगी किमत पर दी जा रही है वहीं दूसरी ओर वीवीआइ्रपी जिलों को एक चैथाई दरा¢ं पर 24 घण्ट¢ं बिजली दी जा रही है न्यायालय उपरा¢क्त याचिका को निस्तारित करते हुए प्रबन्ध निदेशक, पूविविनिलि, वाराणसी को 05 मार्च, 2014 को पारित आदेश में याचिका में दर्षाये गये याचिका कर्ता का आरा¢प यह है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर प्रबन्ध निदेशक, पू.वि.वि.नि.लि, वाराणसी द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई और न ही जनपद-सोनभद्र को 24 घण्ट¢ं विद्युत आपूर्ति की जा रही हे, वहीं दूसरी ओर तथाकथित वीवीआइ्रपी जिलों से चार गुना अधिक विद्युत बिल लगातार प्रेषित किया जा रहा हे ओर बडे़ पैमाने पर विद्युत बिल बकाया क¢ आधार पर विद्युत कनेक्शन काटा जा रहा है जिसक¢ पश्चात याचिकाकर्ता द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय क¢ समक्ष न्यायालय द्वारा 05 जुलाई, 2013 को पारित आदेश का अनुपालन न सुनिष्चित किये जाने क¢ बाबत अवमानना याचिका दाखिल की गई जिस पर शुक्रवार को न्यायालय ने उपरा¢क्त आदेश पारित किया हैं 
पंकज मिश्रा
" न्यायालय का यह आदेश लोक सभा चुनाव क¢ समय सत्ताधारी दल क¢ लिये चुनौती क¢ रूप में सामने आया है, जहाँ एक ओर तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों में पूर्व की भाँति 24 घण्ट¢ं विद्युत आपूर्ति बहाल रखना एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर न्यायालय क¢ इस आदेश क¢ अनुसार तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों क¢ समान अन्य जनपदों में अविलम्ब समान रूप से विद्युत आपूर्ति बहाल करना एक बड़ी चुनौती हा¢गी। याचिकाकर्ता क¢ अनुसार सोनभद्र सहित प्रदेश क¢ अन्य जनपदों में तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों की तरह अविलम्ब बिजली आपूर्ति न किये जाने की स्थिति में तथाकथित वीवीआइ्रपी जनपदों क¢ मतदाताओं को मनमाने एवं अवैधानिक तरीक¢ से 24 घण्टा विद्युत आपूर्ति कर प्रभावित करने क¢ प्रकरण पर चुनाव आयोग से हस्तक्षेप कर सम्बन्धित अधिकारियों को अविलम्ब हटाये जाने व पूर¢ प्रदेश में समान विद्युत वितरण व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी जायेगीं।"
शक्ति आनंद
"आगामी लोक सभा चुनाव  से ठीक पहले राबर्टसगंज संसदीय क्षेत्र से उठे इस बिजली क¢ मुद्दे पर इस संसदीय क्षेत्र में लोक सभा में ख्वाहिष पाले नेताओं व दलों का क्या जवाब होगा। यह महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वर्षों से अलग-अलग मंचों से सोनभद्र को बिजली कटौती मुक्त करने की मांग हमेशा से उठती रही है न्यायालय क¢ इस रूख से सोनभद्र क¢ बिजली उपभोक्ताओं में अपने साथ न्याय होने की उम्मीद जगी हैं।"

सोमवार, 6 जनवरी 2014

बिजली बिल नाम पर हो रहे अन्याय के खिलाफ ऊर्जान्चल परिक्षेत्र के लोग लामबंद

ऊर्जान्चल परिक्षेत्र जो ऊर्जा उत्पादन में विश्व में अपना अद्वितीय स्थान रखता है, यहाँ कि उत्पादित बिजली से चहुँओर उजाला एवं विकास हो रहा है, परन्तु ऊर्जान्चल के रहवासियों और यहां के विस्थापितों जिनकी कई पीढ़ीयों ने विस्थापन का दंश झेला है और अपना सर्वश्व राष्ट्रहित में ऊर्जा उत्पादन के लिये समर्पित कर दिया, उन्हीं के साथ बिजली विभाग ऐतिहासिक अन्याय कर रहा है। 

बिजली बिल
जहाँ एक ओर ऊर्जान्चल के धरती से पैदा हुई बिजली से रौशन जनपद इटावा, कन्नौज व मैनपूरी और बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति की जा रही है और बिजली बिल मात्र 445 से 517 रूपये उपभोक्ताओं से लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ऊर्जान्चल के सभी गांव में बिजली भी मयस्सर नहीं है और जिन ग्राम पंचायतों में 16 से 18 घण्टे बिजली आपूर्ति की भी जा रही है, वहां पिछले तीन सालों से ग्रामीण उपभोक्ताओं से बिजली बिल के नाम पर लूट का नया किर्तिमान बनाकर वर्तमान में 1718 रूपये बिजली बिल के नाम पर लूटा जा रहा है। 

जबकि ऊर्जान्चल के 95 प्रतिशत किसान विद्युत उत्पादन हेतु विभिन्न परियोजनाओं की स्थापना के लिये किये गये भूमि अधिग्रहण से भूमिहीन है एवं पीढ़ियों के विस्थापन के दंश के बावजूद भी उन्हें आज तक न तो बिजली की समुचित सुविधा मिल पायी है, दूसरी ओर बिजली बिल के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से चार से पाँच गुना अधिक बिजली बिल वसूली जा रही है। 

पदयात्रा मे में शामिल लोग 
इस समस्या के लिये ऊर्जान्चल वासियों ने 29 दिसम्बर, 2013 को एक ऐतिहासिक अन्याय का विरोध और सोनभद्र को कटौती-मुक्त व निःशुल्क बिजली दिये जाने के लिये एक जन-आन्दोलन का आगाज किया। आन्दोलन के प्रथम-चरण में दिनांक 29 दिसम्बर, 2013 को दिन के 12ः00 बजे से डिबुलगंज से नेहरू चैक थाना-अनपरा तक पदयात्रा कर व 03ः00 बजे सायं से 05ः00 सायं तक आम-सभा करने के पश्चात मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश व अन्य को सम्बोधित ज्ञापन सौपें। यह एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम था, जिसे आम-जनों द्वारा आयोजित किया गया था। जिसमें लोग अपने साथ राष्ट्रीय-ध्वज और बिजली समस्या से सम्बन्धित नारे लिखे तख्ती/पोस्टर लेकर इस कार्यक्रम में भाग लेने में पिछे नहीं रहें।