रविवार, 16 फ़रवरी 2020

हिण्डालको मे बंधुआ मजदुरी जैसा दौर, हिटलरी फरमानो की भरमार

उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र के रेणुसागर व रेणुकुट मे स्थित हिण्डालको की परियोजनाओ मे संविदा मजदुरो के लिये बंधुआ मजदुरी के जैसा दौर चल रहा है हिण्डालको की रेणुसागर पावर डिवीजन मे मजदुरो के कार्यस्थल पर खाद्द पदार्थो को रेट बढाया जाता है और मजदुर विरोध करते है तो 250-300 मजदुरो को निकाल दिया जाता है और अपर श्रमायुक्त के निर्देश के उपरान्त भी खाद्य पदार्थो के बढाये गये मुल्यो को वापस नही लिया जाता है और हिण्डालको रेणुकुट मे ठेका मजदुरो से एक निर्धारित प्रारुप मे उनके पहचान के हिण्डालको मे कार्यरत स्थाई कर्मियो से लिखित शपथ पत्र मांगा जा रहा है कि यदि वह ठेका मजदुर जिसके सम्बन्ध मे हिण्डालको के किसी स्थाई कर्मचारी द्वारा काम पर रखे जाने की सहमति जताई जा रही है तो उस मजदुर से होने वाली हानि की भरपाई उस स्थाई कर्मचारी के ग्रेच्युटी व पीएफ के पैसे से की जायेगी। इस तरह की घोषणा जो कोई श्रम कानुन मांगे जाने की अनुमति नही देता है वह काम पर रखे जाने के पुर्व मे मांगी जा रही है जबकि किसी तरह की हानि होना भविष्य के गर्त मे है। हिण्डालको प्रबन्धन की संविदा मजदुर विरोधी ज्योतिष विद्या इस तरह है कि मजदुर से हानि हो सकती है यह उनकी सोच है परन्तु उस मजदुर से होने वाले लाभ का अंश किसे दिया जायेगा इसका जवाब शायद हिण्डालको प्रबंधन के पास नही होगा और मतलब निरंकुशता इस कदर की हानि की भरपाई किसी मजदुर से सम्बन्धित स्थाई कर्मी के भविष्य निधि और ग्रेच्युटी के पैसे से कटौती कर की जायेगी ऐसा प्रारुपी शपथ पत्र मांगते समय हिण्डालको को श्रम कानुन का तनिक भी भय नही है और श्रम कानुन का भय हो भी क्यो रेणुसागर के प्रकरण मे डीएलसी पिपरी ने तीन बार से ज्यादा रेणुसागर पावर डिवीजन हेड के.पी. यादव को औद्योगिक शांति बनाये रखने हेतु वार्ता मे आने की नोटिस दी परन्तु रेणुसागर पावर डिवीजन हेड के.पी. यादव नही पहुंचे और थक-हार कर डीएलसी पिपरी को कहना पड गया था कि आप स्वयं औद्योगिक शान्ति नही चाहते है तभी वार्ता मे नही आ रहे है औऱ जिसके बाद रेणुसागर की घटना घटी थी और 250 से 300 मजदुर काम से निकाल दिये गये और श्रम विभाग के अधिकारी सब कुछ जानते हुये भी एक कार्यवाही प्रबन्धन के उपर नही कर पाये और सबसे बडा दुर्भाग्य है कि हिण्डालको की इन परियोजनाओ मे स्थित स्थाई कर्मचारियो की युनियन जिन्दा लाश जैसी है जिन्हे मैने खुद के जानकारी के 10 वर्ष के कार्यकाल मे कभी भी हिण्डालको की श्रमिक विरोधी नितियो के विरुध्द मुखर होते नही देखा। परन्तु तानाशाही का दौर कितना भी गहरा हो एक बगावती आवाज जरुर जिन्दा रहती है और हिण्डालको रेणुकुट के इस हिटलरी फरमान के विरुध्द भी सोनभद्र की दिनकर कपुर के नेतृत्व वाले ठेका मजदुर युनियन के नेता नौशाद मियां ने मुखर होकर विरोध जताया है तथा अपर श्रमायुक्त, पिपरी(विन्ध्याचल मण्डल) को पत्र भेजकर इस तरह की अवैधानिक घोषणा शपथ पत्र प्रारुप को वापस लिये जाने का निर्देश हिण्डालको प्रबन्धन को देने की मांग की है।

रेलवे की साईडिंग पर अवैध तरीके से कोयला स्टाक कर हो रही हेरा-फेरी

पुर्व मध्य रेलवे, धनबाद रेलवे मण्डल, चोपन रेल खण्ड के कृष्णशिला स्टेशन के समीप रेलवे साईडिंग पर बगैर रेलवे विभाग की अनुमति के 25 से 30 हजार टन कोयला अवैध तरीके से स्टाक कर रखा गया है व जानकारी के अनुसार उक्त कोयले का भण्डारण R.K.M PowerGen Pvt. Ltd. द्वारा किया गया है तथा जहां से उक्त कोयले को मण्डियो और अन्यत्र स्थानो पर बेचा जा रहा है। रेलवे साईडिंग पर वही कोयला स्टाक किया जाता है जिसका अभिवहन रेलवे वैगन के माध्यम से किया जाना है परन्तु इस कोयले को ट्रेलर-ट्रीपर आदि मालवाहको के माध्यम से रोड-मोड से बेचा जा रहा है और सुत्रो की मानना है कि इस अवैध भण्डारण के माध्यम से चल रहे खेल के आड मे रेलवे वैगन से जाने वाला कम्पनियो का कोयला भी चोरी होने की प्रबल सम्भावना है। इस प्रकरण पर कई लोगो द्वारा डीटीएन-चोपन से बात करने पर भी अभी तक रेलवे साईडिंग पर प्राईवेट पार्टी द्वारा किये गये कोयले के अवैध भण्डारण पर कोई कार्यवाही नही की गयी है और रेलवे विभाग के छोटे अधिकारी कुछ भी कहने से कतरा रहे है और कह रहे है यह बडे स्तर का मामला है।

चोपन रेल खण्ड मे रेलवे की जमीने हो रही कब्जा, जिम्मेवार बन रहे अनभिग्य

पुर्व मध्य रेलवे, धनबाद रेल मण्डल, चोपन रेल खण्ड के अन्तर्गत अनपरा व कृष्णशिला रेलवे स्टेशन के मध्य ग्राम औडी मे करैला-शक्तिनगर रेल लाईन के दोहरीकरण मे पडने वाली भूमियो पर भूमाफियो द्वारा कब्जा कर मुआवजा पाने के उद्देश्य से निर्माण कार्य किये जा रहे है और जिम्मेवार जान-बुझकर इनके प्रभाव मे आकर अनभिग्य बन रहे है। इन्ही जमीनो को लेकर पुर्व मे तत्कालीन जिलाधिकारी-सोनभद्र अमित सिंह ने पुलिस व तहसील दुध्दी प्रशासन को निर्देश दिया था कि इन भूमियो पर किसी के द्वारा कोई हस्तक्षेप न किया जाये यह रेलवे विभाग की भूमिया है व यदि कोई हस्तक्षेप करे तो कार्यवाही की जाये परन्तु भूमाफिया बडे बडे निर्माण कर रहे है और रेलवे विभाग के साथ-साथ पुलिस व तहसील दुध्दी प्रशासन भी मौन है। इन जमीनो पर कब्जा करने वाले लोग दो बिस्वा जमीन का कागज लेकर उन गाटा नम्बरो जो राजस्व विभाग के नक्शे मे रेलवे के आर.ओ.डब्ल्यु एरिया मे चिन्हित है पर निर्माण कर रहे है औऱ रेलवे के अधिकारियो को जांच के दरम्यान भ्रमित कर सफल हो रहे है। रेलवे विभाग के पास सबसे ज्यादा जमीन होने के बाद भी करैला-शक्तिनगर रेल लाईन के दोहरीकरण के कार्य मे रेलवे को जमीनो को लेकर काफी कठिनाईयो का सामना करने का कारण यही सब है क्योकि रेलवे विभाग के पास भूमि-राजस्व सम्बन्धित मामलो के जानकार अधिकारी नही है और जो अधिकारी भूमि सम्बन्धित मामले देखते है उन्हे स्वयं पता नही होता है कि रेलवे ने इस क्षेत्र मे कितनी भूमि अधिग्रहित की है, उसका सीमांकन राजस्व विभाग द्वारा किस प्रकार से किया गया है व आज रेलवे विभाग के नाम कितनी भूमि बची है तथा रेलवे विभाग द्वारा रेलवे कि भूमियो पर कब्जा किये जाने की शिकायतो के जांच दरम्यान यह सब जानकारी न होने के कारण भूमाफिया बरगलाने व भ्रमित करने मे सफल हो जाते है।

योगी सरकार मे छीनी जा रही आदिवासियो की जमीन, नही है पीने को शुध्द पीने

चालीस से ज्यादा आदिवासी परिवार ऐसे है जिनके जोत-कोड व कब्जे कि भूमि कि अधिभोग के हक के बाबत् वनाधिकार के दावे ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति से अग्रेसित होकर उपखण्ड स्तरीय समिति दुध्दी के समक्ष लम्बित है व दावो के सत्यापन तथा मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया लम्बित है इसी बीच अनपरा तापीय परियोजना द्वारा अपने राख बन्धे का उच्चीकरण का कार्य शुरु कर दिया गया जिससे इन आदिवासियो को वनाधिकार के तहत् अधिभोग मे प्राप्त भूमि व अधिभोग के हक के बाबत् लम्बित दावो कि भूमिया उस पर की गयी खेती व उन पर स्थित मकान प्रभावित होने लगे है व राख बन्धे के उच्चीकरण से राख मिश्रित जल तेजी से आदिवासियो कि भूमि व उन पर स्थित मकानो की ओर बढ रहा है तथा जिससे आदिवासियो की खेती आंशिक प्रभावित हो गयी है व आने वाले दिनो मे उनकी भूमि, भवन पुर्णतः राख बन्धे के राख मिश्रित जल मे समाहित हो जायेंगे तथा इन भूमियो को लिये जाने हेतु कोई विधिक प्रक्रिया नही अपनाई गयी है व बगैर प्रतिकर एवं पुर्नवास के वह अपनी भूमि व मकानो से बेदखल कर दिये जायेंगे तथा उनके पारम्परिक कुंये के राख बन्धे के राख मिश्रित जल मे समाहित होने व उनके पास पेयजल का अन्य कोई साधन न होने के कारण वह राख बन्धे के समीप अपनी भूमियो पर चुंआड खोदकर राख मिश्रित जल जिसमे मर्करी, आर्सेनिक, फ्लोराईड जैसे विषाक्त तत्व होते है व हड्डियो का टेढापन, बांझपन, मानसिक विकृतियो जैसे रोग होते है को पीने को मजबुर है उन्होने मानवाधिकार आयोग व राष्ट्रीय अनुसुचित जनजाति आयोग के सदस्यो की एक उच्च समिति बनाकर जांच किये जाने तथा फौरी राहत के तौर पर आदिवासियो को शुध्द पेयजल उपलब्ध कराये जाने तथा आदिवासियो को उन्हे वनाधिकार मे दी गयी भूमि और उस पर स्थित मकानो का प्रतिकर, पुर्नवास लाभ व पुर्नवास प्लाट देकर  पुर्नवासित न किये जाने तक राख बन्धे के उच्चीकरण का कार्य रोके जाने हेतु मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन व मैनेजिंग डायरेक्टर, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को निर्देशित किये जाने तथा राख बन्धे के उच्चीकरण से जोत-कोड व कब्जे कि भूमियो व मकानो के प्रभावित होने उपरान्त भी प्रतिकर व पुर्नवास लाभ तथा पुर्नवास प्लाट देकर पुर्नवासित न करते हुये राख बन्धे के 10 मीटर समीप अमानवीय परिस्थितियो मे रहने हेतु मजबुर किये जाने बाबत् सम्बन्धितो के विरुध्द आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है। अंकुश दुबे ने कहा है कि ग्राम बेलवादह के आदिवासियो को कांग्रेस के लाये कानुन के तहत् जोत-कोड व कब्जे के आधार पर अधिभोग हेतु हक मे दी गयी भूमि आज योगी सरकार द्वारा जबरन छीनी जा रही है व शुध्द पेयजल की प्राप्ति, सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मौलिक अधिकार है व किसी भी व्यक्ति के सम्पत्ति को बगैर विधिक प्रक्रिया के लिया जाना संविधान के अनुच्छेद 300(ए) का हनन है व आशा है कि मानवाधिकार आयोग व अनुसुचित जनजाति के आयोग के हस्तक्षेप के उपरान्त आदिवासियो को न्याय व शुध्द पेयजल प्राप्त हो सकेगा।

ग्राम बेलवादह के कैम्हाडांण के आदिवासी परिवार अनपरा तापीय परियोजना के राख बंधे के 10 मीटर दुर अमानवीय परिस्थितियो मे रहने को मजबुर है व इन आदिवासी परिवारो के पारम्परिक कुंये के राख बन्धे मे समाहित होने व अन्य पेयजल के साधन न होने के कारण पचास से ज्यादा आदिवासी परिवार राख बन्धे के राख मिश्रित जल जमाव के समीप अपनी भूमियो पर चुंआड खोदकर जिससे राख मिश्रित जहरीला जल निकलता है को पीने पर मजबुर है। इस प्रकरण पर सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे ने मानवाधिकार आयोग व अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र भेजकर हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है। दुबे ने अपने पत्र मे बताया है कि ग्राम बेलवादह मे भारतीय वन अधिनियम - 1927 की  धारा-4 की उपधारा-1 (ए) के तहत् विग्यापित भूमियां जिन पर आदिवासी परिवारो का 13 दिसम्बर, 2005 के पुर्व जोत-कोड व कब्जा था व मकान बनाकर निवास कर रहे थे पर आदिवासियो के जोत-कोड को मान्यता देते हुये इनके जोत-कोड व कब्जे कि भूमि के अधिभोग के बाबत् इन्हे अनुसूचित जाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारो की मान्यता) अधिनियम-2006 के तहत् हक देते हुये अभिलिखित कर दिया गया है

व्यापार संगठन ईकाई औडी के अध्यक्ष विजय ठाकुर मनोनीत, कोषाध्यक्ष आशीष गोयल निर्विरोध, दिनेश अग्रहरि महामंत्री निर्वाचित

उत्तर प्रदेश व्यापार प्रतिनिधि मण्डल, इकाई – औड़ी बाजार के पदाधिकारीयो का चुनाव संपन्न हुआ, अध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति से विजय ठाकुर, कोषाध्यक्ष पद पर आशीष गोयल निर्विरोध हुये व महामंत्री पद पर दिनेश अग्रहरी बतौर मतदान से अपने नजदीकी दावेदार प्रयाग प्रसाद से10 मत अधिक पाकर विजयी हुये। दिनभर चले महामंत्री पद के लिए हुए मतदान में कुल व्यापारी संगठन के 237 मतदाताओ में से 144 व्यापारियों ने अपने मत का प्रयोग किया, काशी मोड़ के दिनेश अग्रहरी ने 75 मत प्राप्त किया और इस पद पर विजय दर्ज कि उनके प्रतिद्वंदी औड़ी मोड़ के प्रयाग प्रासाद में ने 65 मत प्राप्त किया, चुनाव प्रक्रिया मे 4 मत अवैध पाए गए, इससे पहले कोषाध्यक्ष पद पर औड़ी मोड़ के आशीष गोयल के अलावा किसी अन्य कि दावेदारी न आने कि वजह से इस पद पर आशीष गोयल की निर्विरोध जीत दर्ज की गयी। जीते हुए महामंत्री दिनेश अग्रहरी और कोषाध्यक्ष आशीष गोयल ने अध्यक्ष पद पर विजय ठाकुर को प्रस्तावित किया जिसे उपस्थित सैकड़ो व्यापारियों ने अपनी सर्व सहमती देते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश व्यापार प्रतिनिधि मण्डल, इकाई – औड़ी बाज़ार व्यापार संगठन का अध्यक्ष मनोनीत किया। अध्यक्ष के मनोयन पश्चात सभी व्यापारियों ने गाजे-बाजे, माला-फुल, मिठाई और रंग अबीर के साथ दुराशानी मंदिर से नेहरु चौक, काशी मोड़ होते हुए गेट नम्बर-2 तक पदयात्रा निकाल कर सभी व्यापारी बंधुओ से आशीर्वाद प्राप्त किया। पद यात्रा व चुनाव प्रक्रिया मे मुख्य रूप से प्रधान प्रतिनिधि औडी शक्ति आनंद, क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश दुबे, पुर्व एनएसयुआई नेता डा.तेजबल वैद्य, सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डू उपाध्याय, दरोगा यादव, अवधराज सिंह, विजयमल गिरी, दिलीप यादव, त्रिवेणी पाण्डेय शिवकुमार सिंह, अजित सिन्हा, सतीश यादव, प्रमोद बिन्द, जीतेन्द्र गुप्ता, राकेश गिरी, पंकज गुप्ता, नंदी जैन, विनोद गुप्ता, जोगी सेठ, धर्मेन्द्र गुप्ता, पवन अग्रहरी, रामासंत गिरी, नरेश कंसल, नागेन्द्र चंद्रवंशी, मनोज यादव, मुन्न्रर पनिका, प्रेम शंकर पाण्डेय आदि सम्मलित रहे व प्रधान प्रतिनिधि औडी शक्ति आनंद, क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश दुबे, पुर्व एनएसयुआई नेता डा.तेजबल वैद्य ने संयुक्त रुप से निर्वाचित कोषाध्यक्ष, महामंत्री व मनोनीत अध्यक्ष बधाई देते हुये कहा कि हम सभी व्यापार संगठन के पदाधिकारियो के साथ मिलकर व्यापारी भाईयो के समस्या निवारण के लिये हर सम्भव प्रयास करेंगे।

लोझरा-खजुरा सडक निर्माण पर वन विभाग का ग्रहण, नही दिया जा रहा रास्ते का सामुदायिक अधिकार

January 28, 2020 • Banwasi weekly • TRIBAL ISSUE
ग्राम कुलडोमरी व आस पास गांवो के 40 हजार से आदिवासी परिवारो के आवागमन के मार्ग लोझरा-खजुरा मार्ग पर वन विभाग द्वारा पुर्व मे वनाधिकार कानुन के तहत् सामुदायिक अधिकार के रुप दिये गये सडक निर्माण हेतु आदेश को निरस्त करने के कारण लोझरा-खजुरा मार्ग निर्माण पर ग्रहण लग गया है तथा जिसके कारण एनसीएल के सीएसआर कार्यक्रम के तहत् उक्त सडक का निर्माण नही हो पा रहा है। आपकी जानकारी के लिये बता दिया जाये कि ग्राम कुलडोमरी मे लोझरा-खजुरा मार्ग के निर्माण को एनसीएल सीएसआर कार्यक्रम के तहत् किये जाने हेतु सम्मिलित किया गया था, उक्त सडक निर्माण मे एक हेक्टेयर से कम वन भूमि पड रही थी जिसके लिये ग्राम वनाधिकार समिति द्वारा रास्ते के रुप मे उक्त मार्ग का उपयोग 13 दिसम्बर, 2005 के पुर्व से करने के कारण वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत् रास्ते के अधिकार के रुप मे सामुदायिक अधिकार देने का प्रस्ताव पारित कर उपखण्ड स्तरीय समिति दुध्दी को भेज दिया गया था जिसके क्रम मे प्रभागीय वनाधिकारी, रेणुकुट वन प्रभाग द्वारा एक साल के भीतर रास्ते का कार्य प्रारम्भ किये जाने की शर्त के साथ रास्ते के निर्माण हेतु आदेश जारी किया गया था परन्तु उक्त रास्ते के अधिकार को सामुदायिक अधिकार के रुप मे अभिलिखित नही किया गया व अभिलिखित प्रति ग्राम वनाधिकार समिति को नही दी गयी तथा तकनीकी कारणो से एक वर्ष के अन्दर सडक निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ न होने के कारण आदेश की शर्त का उल्लंघन होने के कारण उक्त आदेश निरस्त कर दिया गया है जिससे सडक निर्माण का कार्य बाधित होता नजर आ रहा है। सोनभद्र मे सामुदायिक अधिकार के रुप मे दिये जाने वाले अधिकार गलत तरीके से दिये जा रहे जिससे इस तरह की समस्या खडी हो रही है व आदिवासियो के लिये मुलभुत सूविधा सडक, विद्यालय, चिकित्सालय आदि का निर्माण नही हो पा रहा है दरअसल वनाधिकार कानुन के तहत् जो सामुदायिक अधिकार दिया जाना है उसे पहले अभिलिखित कर मान्यता दी जानी है तथा जिसके आधार पर युजर ऐजेन्सी को निर्माण कार्य हेतु वन विभाग द्वारा अनुमति दी जानी है परन्तु सोनभद्र मे सामुदायिक अधिकार को बगैर मान्यता दिये व अभिलिखित किये सशर्त आदेश मात्र जारी किया जा रहा है तथा अधिकार की अभिलिखित प्रति ग्राम वनाधिकार समिति को नही दी जा रही है व सामुदायिक अधिकार सशर्त नही दिया जाना चाहिये क्योकि महुआ बीनने का अधिकार, जंगल मे पशु चराने का अधिकार, जंगल मे लकडी बीनने का अधिकार भी सामुदायिक अधिकार है व यदि इस तरह से से सशर्त आदेश के रुप मे अनुमति दी जायेगी तो वह सामुदायिक अधिकार दिया जाना नही कहा जायेगा व ग्राम वनाधिकार समिति को अभिलिखित प्रति न दिये जाने से इस अधिकार की पुष्टि करने मे ग्राम वनाधिकार समिति विफल रहेगी जिस कारणवश वन विभाग के अधिकारी सामुदायिक अधिकार के रुप मे रास्ते का प्रयोग, लकडी बीनने, पशु चराने आदि से आदिवासियो को रोकेंगे तथा विवाद के कारण निर्मित होंगे। इस सडक के निर्माण कार्य पर वन विभाग द्वारा पुर्व मे जारी आदेश को निरस्त किये जाने के प्रकरण पर विस्थापित नेता पंकज मिश्रा, एनएसयुआई जिला महासचिव अंकुश दुबे, हरिनाथ खरवार, लक्ष्मीकांत दुबे आदि कांग्रेसियो ने रोष जताते हुये कहा है कि वन विभाग यदि जल्द सडक निर्माण हेतु सामुदायिक अधिकार के रुप मे रास्ते के अधिकार को मान्यता व अभिलिखित करते हुये एक हेक्टेयर से कम पड रही वन भूमि पर निर्माण हेतु अनुमति नही देता है तो सैकडो आदिवासियो के साथ वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जायेगा व प्रदेश सरकार वनाधिकार कानुन को विफल करने मे लगी है तभी आदिवासियो को सामुदायिक अधिकार के रुप मे रास्ते का अधिकार नही दिया जा रहा है तथा दुर्भाग्य है कि वनाधिकार कानुन लागु होने के एक दशक बाद भी आदिवासियो के सामुदायिक अधिकारो को मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया पुर्ण नही की गयी है।

वनाधिकार कानुन के तहत् नही दिया जोत-कोड कि भूमियो का हक व मान्यता-अजय लल्लु

आज उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय लल्लु ने सोनभद्र के ओबरा विधानसभा के सलखन गांव मे चौपाल मे हिस्सा लिया जहां उत्साह से लबरेज सैकडो कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने अपने प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत किया गया व कार्यक्रम के दरम्यान ओबरा विधायक संजय गोंड के भाई रामु गोंड ने कांग्रेस के प्रति आस्था दिखाते हुये सैकडो समर्थको के साथ सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम मे भीड जुटाने के लिये कांग्रेसियो ने महिला गायक चंचल का प्रोग्राम आयोजित किया था।

कार्यक्रम मे कनहर परियोजना के विस्थापितो के नेता गम्भीरा प्रसाद ने विस्थापितो को भूमि अधिग्रहण कानुन-2013 के धारा-24 (2) का लाभ दिये जाने की मांग को विधानसभा मे उठाये जाने का आग्रह किया व अन्य सैकडो आदिवासी नेताओ ने जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर अपनी बात रखी जिसके पश्चात अपने उद्बोधन मे प्रदेश अध्यक्ष लल्लु ने प्रदेश सरकार पर आक्रमण करते हुये कि जल-जंगल-जमीन का राजा आदिवासी है व वनाधिकार कानुन को आदिवासियो को उनके वन भूमि पर जोत-कोड को मान्यता व अभिलिखित किये जाने हेतु कांग्रेस पार्टी द्वारा लाया गया था परन्तु सपा-बसपा की सरकारो द्वारा इसे प्रभावी नही होने नही दिया गया व वर्तमान की भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियो का दमन करते हुये उन्हे उनके जोत कोड कि भूमियो से बगैर प्रक्रिया पुर्ण किये बेदखल किया जा रहा है व जिन आदिवासियो के जोत-कोड कि भूमि को वनाधिकार के तहत् मान्यता दी गई है उन्हे उनके सम्पुर्ण जोत-कोड कि भूमि की मान्यता नही दी गई है व अभिलिखित नही किया गया है तथा कनहर के विस्थापितो को भूमि अधिग्रहण कानुन-2013 के तहत् प्रतिकर व पुर्नवास लाभ दिये जाने तथा नेहरु जी के सिध्दान्तो के अनुसार भूमि के बदले भूमि दिये जाने की मांग प्रदेश सरकार से रखी। इस दरम्यान सैकडो आदिवासी महिला व पुरुष उपस्थित रहे।

क्या सोनांचल संघर्ष वाहिनी बन पायेगी सोनभद्र का दुसरा समीकरण

आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन जिले मिर्जापुर का हिस्सा व वर्तमान सोनभद्र जिले की अपनी एक अलग पहचान है जिसके सृजनकर्ता कांग्रेस के स्व. सांसद रामप्यारे पनिका जी रहे है। सोनभद्र अक्सर विवादित होने के कारण भारत मे जाना गया है जिसका कारण इस जनपद मे अकुत खनिज सम्पदा का भण्डारण होना है यह जिला कभी नक्सलवाद मिटाने के ढोंग के नाम पर रन टोला काण्ड मे निरीहो की हत्या तो कभी पोंटी चड्ढा के अवैध खनन तो कभी  खदान हादसे तो कभी डाला सीमेन्ट फैक्ट्री मे गोलीबारी तो कभी कनहर मे अकलु चेरो के छाती पर गोली मारे जाने के कारण तो आज उम्भा काण्ड के कारण सुर्खियो मे आता रहा है अर्थात यह जिला सदैव विवादित रहा है और महत्वपुर्ण है कि यह उत्तर प्रदेश सरकार को अत्यधिक राजस्व देने वाले प्रमुख जिलो मे से एक है। इस जिले मे सर्वाधिक विवाद वन भूमि, खनन के कारण होते है और दुसरा विवाद का कारण भूमियो का अधिग्रहण है इस जिले मे विभिन्न सिंचाई, ताप, कोयला व अन्य परियोजनाओ हेतु भूमियो को पुर्नग्रहण अथवा अधिग्रहण के माध्यम से लिया गया है। इस सोनभद्र जिले मे रिहन्द बांध, कनहर बांध, अनपरा तापीय परियोजना, रेनुसागर पावर डिवीजन, डाला सीमेन्ट फैक्ट्री, एनसीएल की कोयला खदानो हेतु भूमियो को अधिग्रहण, पुर्नग्रहण अथवा म्युच्युल कन्सेन्ट के माध्यम से लिया गया है तथा इन परियोजनाओ के तमाम विस्थापितो कि भूमियो को लिये जाने के बाद या तो नियमानुसार उन्हे पुर्नवासित नही किया गया अथवा आज उन्हे इन परियोजनाओ मे सृजित कार्यो मे रोजगार न दिये जाने के कारण विस्थापित भुखमरी के कगार है व आजिविका के संकट से जुझ रहे हैं व दुसरी ओर खनन से प्रभावित लोगो को खनन कार्यो मे रोजगार न मिलने के कारण इन खनन प्रभावित व विस्थापित लोगो मे प्रमुख राजनीतिक दलो के प्रति एक आक्रोश है जो दुसरा राजनीतिक समीकरण न होने के कारण कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा के इर्द गिर्द घुमता रहता है तथा न चाहते हुये भी यह इन पार्टियो को हर बार अलग अलग अवसर देते रहते है परन्तु आज तक समस्या का हल नही हुआ है।

सोनभद्र जिले के ओबरा मे स्थित ओबरा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र नेता रोशन लाल यादव  जो कभी मुलायम सिंह यादव के करीबी भी रहे भले ही आज उन्होने समाजवादी पार्टी से दुरी बना अपनी एक अलग पार्टी बना ली है। रोशन लाल यादव सदैव शुरु से ही क्रान्तिकारी प्रवृत्ति के रहे है और उन्होने लगातार सोनभद्र मे दुर्व्यवस्थाओ चाहे व अवैध खनन हो या स्थानीय नौजवानो के रोजगार की समस्या हो या आदिवासियो की जल-जंगल-जमीन की समस्या के निराकरण व स्वायत्तशासी सोनांचल राज्य की मांग को लेकर लगातार मुखर होकर अपने संगठन सोनांचल संघर्ष वाहिनी के बैनर तले आवाज उठाई है। अब वर्ष 2019 मे रोशन लाल यादव के संगठन सोनांचल संघर्ष वाहिनी को निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दल के रुप मे मान्यता दी है व रोशनलाल आने वाले दिनो मे अपने राजनीतिक दल सोनांचल संघर्ष वाहिनी का राष्ट्रीय अधिवेशन करने जा रहे है जिसके लिये उन्होने कई दिग्गज नेताओ को आमंत्रण भी दे दिया है परन्तु इन परिस्थितियो मे यह प्रश्न उठता है कि क्या सोनांचल संघर्ष वाहिनी प्रमुख राजनीतिक दलो से परे हटकर सोनभद्र का दुसरा समीकरण बन पायेगी व सोनभद्र के जनता के दिल मे जगह बना पायेगी क्योकि जिस पार्टी कांग्रेस ने सोनभद्र को अलग व स्वयं की पहचान दी उस पार्टी को विगत् कई चुनावो मे कोई सफलता नही मिली है तथा कांग्रेस धुल फांक रही है व यदि सोनांचल संघर्ष वाहिनी अन्य विकल्प बनती है तो उसके प्रमुख उद्देश्य क्या होंगे यह भविष्य के गर्त मे है हम आपको सोनांचल संघर्ष वाहिनी के विजन व मुद्दे अगले अंक मे बतायेंगे तब तक सोनभद्र की विशेष खबरो हेतु आप हमारे न्युज पोर्टल पर नजर बनाये रहिये।

हाईटेंशन तार टुटने से किशोर घायल, मुआवजे व तारो के अनुरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन

जनपद के विद्युत वितरण खण्ड पिपरी के अन्तर्गत आने वाले ग्राम परासी मे 13 जनवरी को लगभग 11 बजे हाईटेंशन तार के अचानक टुटने से परासी मे एक किशोर प्रिंस कुमार गम्भीर रुप से घायल हो गया जिसे अफरा तफरी मे उसके परिवार के लोगो द्वारा नेहरु शताब्दी चिकित्सालय ले जाया गया व जहां से उसे अत्यधिक गम्भीर बताते हुये बनारस के लिये रिफर कर दिया गया है।जिससे आक्रोशित नौजवानो ने सामाजिक कार्यकर्ता अंकुश दुबे के नेतृत्व मे पंचायत भवन परासी से लेकर महावीर चौक अनपरा तक बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी व लापरवाही का आरोप लगाते हुये प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरान्त अंकुश दुबे ने कहा कि बिजली विभाग हाईटेंशन तार के अचानक टुटने से घायल प्रिंस की जिम्मेवार है तथा बिजली विभाग अपने जिम्मेवारी से बच रही है तभी इस प्रकरण की जांच व घायल को मुआवजा दिये जाने हेतु किसी प्रकार कि सूचना बिजली विभाग द्वारा विद्युत सुरक्षा निदेशालय, जोनल कार्यालय मिर्जापुर को नही दी गयी है जो कि गलत है तथा मांग रखी कि बिजली विभाग घायल के परिजनो को इलाज हेतु 10 लाख रुपये का मुआवजा दे वही प्रदर्शन मे शामिल बडकु बैसवार व मनीष बैसवार ने कहा कि बिजली विभाग द्वारा तारो का नियमित अनुरक्षण न कराये जाने से आज ऐसी दुर्घटना घटी है भविष्य मे फिर कभी ऐसी घटना न घटित हो इसके लिये परासी मे स्थित विद्युत आपुर्ति वाले तारो का अनुरक्षण कराया जाये व खराब तार बदले जाये। इस दरम्यान पवन बैसवार, मानवेन्द्र कुमार, पप्पु बैसवार,नीरज गहरवार, विकास बैस बंशी, राकेश बैसवार, विद्यासागर आदि ने भी एक स्वर मे मुआवजा व तारो के अनुरक्षण की मांग की व मौजुद रहे। प्रदर्शनकारियो ने कार्यवाही न किये जाने पर बडे आन्दोलन की चेतावनी दी है।

अताप मे नियु्क्त हुये सुरक्षा अधिकारी दिनकर की पहल लाई रंग

अनपरा तापीय परियोजना की अ, ब, स, द ईकाईयो मे लगातार हो रहे दुर्घटनाओ पर वर्कर्स फ्रन्ट के प्रदेश अध्यक्ष की मेहनत व प्रयास रंग लाई है। दिनकर कपुर के पत्रक पर अपर श्रमायुक्त, मिर्जापुर के समक्ष आयोजित वार्ता मे अनपरा तापीय परियोजना ने अपने जवाब मे यह बताया है कि जितेन्द्र मिश्रा ओ.जी. एण्ड सीएचडी अ/ब ताप एवं अनुप जायसवाल ओ.जी. एण्ड सीएचडी,दताप सुरक्षा अधिकारी नामित किये गये है।

सुच्य है कि अताप परियोजना की ईकाईयो मे विगत् वर्षो मे सुरक्षा उपकरणो के न होने के कारण कई दुर्घटनाये घटी है तथा श्रमिको के जान माल की हानि हुई है जिसके विरुध्द वर्कर्स फ्रन्ट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपुर द्वारा निरन्तर आवाज उठाई जा रही थी तथा सुरक्षा अधिकारी के नियुक्ति की मांग की जा रही थी अब सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति हो चुकी है। श्री कपुर ने बताया है कि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति के उपरान्त अब सुरक्षा उपकरणो के अभाव मे हो रही दुर्घटनाओ पर रोक लगेगी व अताप की इकाईयो मे कार्यरत मजदुरो के लिये सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति संजीवनी है।

अनपरा तापीय परियोजना की राख आदिवासी किसानो की खेती कर रही बर्बाद

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की अनपरा तापीय परियोजना हेतु सोनभद्र के दुध्दी तहसील के ग्राम कुलडोमरी, पिपरी, बेलवादह, औडी, अनपरा, ककरी आदि गांवो मे भूमि अधिग्रहण कानुन-1894 के तहत् भूमियो के अधिग्रहण हेतु अधिसूचना जारी की गयी थी परन्तु 31 जनवरी 1979 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिग्रहण कि अधिसूचना से ग्राम कुलडोमरी व अनपरा की कुछ भूमियो को बाहर कर दिया गया था। ग्राम कुलडोमरी मे अधिग्रहण की अधिसूचना से पृथक की गयी भूमियां भारतीय वन अधिनियम - 1927 की धारा-4 की उपधारा-1 (ए) के तहत् विग्यापित थी जिसे लीज पर दिये जाने हेतु भी अनपरा तापीय परियोजना द्वारा वन विभाग को प्रस्ताव दिया गया परन्तु कुलडोमरी की उपरोक्त धारा-4 कि भूमियो पर भौमिक अधिकार के लिये किसानो, वन विभाग व राज्य सरकार के मध्य प्रकरण सर्वे सेटलमेन्ट के न्यायालयो मे विवादित(लम्बित) होने के कारण वन विभाग द्वारा उपरोक्त भूमियो को लीज पर नही दिया गया जिसकी पुष्टि प्रभागीय वनाधिकारी, रेणुकुट वन प्रभाग द्वारा तमाम किसानो को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत् उपलब्ध कराई गयी सूचना से होती है। अर्थात अनपरा तापीय परियोजना के भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही से भी यह भूमिया पृथक है और ना ही वन विभाग द्वारा अनपरा तापीय परियोजना को लीज पर दी गयी है और अनपरा तापीय परियोजना द्वारा इन पर कब्जा किया गया है। अधिग्रहण कि अधिसूचना से ग्राम कुलडोमरी की यह भूमिया पृथक होने के बाद इन भूमियो पर इनके मुल किसानो का नाम राजस्व अभिलेखो मे दर्ज होना था परन्तु जिम्मेदारो के लापरवाही के कारण आज तक मुल किसानो का नाम अधिग्रहण की कार्यवाही से पृथक भूमियो पर राजस्व अभिलेखो मे दर्ज नही हो पाया है।
                                                                                                        
अनपरा तापीय परियोजना के ग्राम बेलवादह मे स्थित राख बन्धे के पुर्णतया भर जाने व राख बन्धे से किसी भी हालत मे रिहन्द जलाशय मे राख न छोडे जाने की एनजीटी द्वारा गठित ओवर साईट कमेटी के सख्ती भरे लहजे जिसमे यह तक कहा जा चुका है कि इन परियोजनाओ को बन्द किया जाये के बाद अनपरा तापीय परियोजना द्वारा आदिवासी व दलित किसानो की ग्राम कुलडोमरी मे स्थित भूमियां जिन्हे राज्य सरकार उत्तर प्रदेश द्वारा 31 जनवरी 1979 को अधिग्रहण की कार्यवाही से पृथक कर दिया गया है व दलित आदिवासी किसान जिस पर वर्तमान मे खेती करते है मे बेलवादह राख बन्धे मे राख जाने वाले पाईप लाईन से एक अलग से पाईप जोडकर बगैर राख निस्तारण हेतु लैण्ड युज के बाबत् प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति व पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किये राख मिश्रित जल(स्लरी) को छोडा जा रहा है जिससे किसानो की खेती प्रभावित हो रही है व उत्तर प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिला प्रशासन मौन बनकर सरकारी उम्भा घटना के घटित होने का इंतजार कर रहा है।

जानकारी के लिये बता दिया जाये कि कोयला आधारित ताप विद्युत गृहो से कोयले के जलने के उपरान्त उत्पन्न होने वाली राख को किसी भी हाल मे खुले स्थान पर नही डाला जा सकता है और यदि राख बन्धे का निर्माण किया जाता है तो इसके लिये लैण्ड युज हेतु अनुमति व राख निस्तारण हेतु पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पडती है परन्तु अनपरा तापीय परियोजना द्वारा मनमाने तरीके से बगैर किसी अनुमति व अनापत्ति प्रमाण पत्र लिये किसानो के खेती वाली भूमियो पर राख डाली जा रही है। अनपरा तापीय परियोजना द्वारा मनमाने तरीके से किया जा रहा राख निस्तारण सर्वप्रथम भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त सम्पत्ति के अधिकार जो पहले मौलिक अधिकारो मे निहित था परन्तु जनता पार्टी की केन्द्र मे सरकार होने पर जिसे विधिक अधिकार मे निहित कर दिया गया है अर्थात अनुच्छेद 300ए के तहत् किसानो को प्राप्त अधिकार का हनन है व उपरोक्त भूमिया वन अधिनियम-1927 की धारा 4 के तहत् भी पुर्व मे विग्यापित रही है व सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशो व निर्देशो के अनुसार डिम्ड फारेस्ट मानी जाती है जिस पर कोई कार्य करने हेतु अनपरा तापीय परियोजना को फारेस्ट विभाग से क्लियरेन्स लेना चाहिए था परन्तु यहा अनपरा तापीय परियोजना द्वारा वन विभाग से क्लियरेन्स नही लिया गया है जो वन संरक्षण अधिनियम-1980 का भी उल्लंघन है।

अनपरा तापीय परियोजना द्वारा जिस तरह से खुले मे राख मिश्रित जल आबादी के मध्य स्थित किसानो की भूमि पर छोडा जा रहा है उसमे मिश्रित जल सुखने के बाद राख वायु मे मिश्रित होकर उडेगी जो अत्यधिक भयावह होगा तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 व वायु (प्रदूषण का बचाव व नियंत्रण) कानून सन 1981 का व संशोधन, 1987 का उल्लंघन है। जिन किसानो की भूमियो पर राख का निस्तारण किया गया है उन्होने फसल क्षतिपुर्ति दिये जाने व पर्यावरणीय क्षतिपुर्ति के एवज मे अनपरा तापीय परियोजना से जुर्माना दिये जाने तथा आबादी के मध्य कृषक भूमियो पर राख निस्तारण रोके जाने की मांग की है वरना उन्होने मामले को अनुसूचित जनजाति आयोग व अनुसूचित जाति आयोग तथा एनजीटी के समक्ष खडा करने की चेतावनी दी है।

एनसीएल की ककरी कोयला खदान ने गलत तरीके से लीज पर दे दी धारा-4 कि भूमि

January 6, 2020 • ANKUSH KUMAR DUBEY • COAL MINES
नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की ककरी कोयला खदान हेतु विभिन्न किसानो के साथ-साथ भारतीय वन अधिनियम-1927 कि धारा-4 की उपधारा-1(ए) के तहत् रक्षित वन भूमि बनाये जाने हेतु प्रस्तावित भूमियो का भी अधिग्रहण किया गया था व उन भूमियो पर सर्वे सेटलमेन्ट के दरम्यान एनसीएल को भौमिक आधार दे दिया गया। सर्वे सेटलमेन्ट की प्रक्रिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सोनभद्र की राबर्टसगंज व दुध्दी तहसील के आदिवासियो को धारा-4 कि भूमि पर कब्जे व जोत-कोड के आधार पर भौमिक अधिकार देने के लिये प्रारम्भ की गयी थी अर्थात सर्वे सेटलमेन्ट मे भूमि किसान, राज्य सरकार व वन विभाग मे से किसी एक को मिलनी थी परन्तु सर्वे सेटलमेन्ट मे इन तीनो के अतिरिक्त एनसीएल की ककरी समेत सोनभद्र मे स्थित बीना, कृष्णशिला, खडिया परियोजना को भौमिक अधिकार दिया गया।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई प्रकरणो मे स्पष्ट किया जा चुका है कि धारा-4 मे विग्यापित भूमि जिसे धारा-20 के तहत् रक्षित वन घोषित नही किया गया है डिम्ड फारेस्ट मानी जायेगी तथा उसके उपयोगार्थ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा सम्बन्धित राज्य के वन विभाग से लीज लेना होगा, जिसके कारण एनसीएल की ककरी परियोजना द्वारा भी इन भूमियो के उपयोग हेतु वन विभाग से लीज व अनुमति ली गयी तथा जिसके एवज मे एनसीएल द्वारा इस भूमि के समतुल्य वन विभाग को हरदोई मे वन भूमि उपलब्ध कराई गयी और प्रतिवर्ष लीज रेन्ट दिया जाता है। एनसीएल की ककरी परियोजना को यह धारा 4 कि भूमि 30 वर्षो हेतु लीज पर दी गयी थी जिसकी लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और एनसीएल द्वारा वन विभाग को लीज नवीनीकरण हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया गया है परन्तु लीज नवीनीकरण के बाबत् वन विभाग द्वारा अभी तक अनुमति नही दी गयी जिसके कारण एनसीएल की ककरी कोयला खदान कुछ दिनो के लिये बन्द भी रही थी परन्तु पुनः बगैर लीज नवीनीकरण आदेश के कोयला खनन का कार्य चालु है और वन विभाग के आला अधिकारी मौन है।

लीज नवीनीकरण के दरम्यान एक बात् सामने आई है कि एनसीएल की ककरी परियोजना के सम्बन्धित अधिकारियो द्वारा लीज पर ली गई इन धारा-4 कि भूमियो को गलत तरीके से बगैर वन विभाग की अनुमति के हिन्डालको की रेनुसागर पावर डिवीजन व लैंको अनपरा पावर लिमिटेड अनपरा को लीज पर दे दिया गया है व मुख्य वन संरक्षक मिर्जापुर ने अपने एक पत्र मे इसे वन संरक्षण अधिनियम-1980 की धारा-2 के विपरीत बताया है और यह प्रकरण उत्तर प्रदेश शासन के समक्ष लम्बित है।  

रेणु-रिहन्द के प्रदुषण पर लगाम लगाये बगैर गंगा स्वच्छता की उम्मीद सरकार का सपना

उत्तर प्रदेश के जनपदः-सोनभद्र व मध्य प्रदेश के जिलाः-सिंगरौली की लगभग 30 लाख की आबादी के पेयजल स्त्रोत रेणु नदी को बांधकर बनाये गये रिहन्द जलाशय (गोविन्द वल्लभ पंत सागर) जो अन्तिम मे गंगा नदी मे जाकर मिलती हैका पानी सिंगरौली-सोनभद्र मे स्थित ताप विद्दुत परियोजनाओ द्वारा राख मिश्रित जल(स्लरी) व कोयला खदान परियोजनाओ के खनन संक्रियाओ की विषाक्त तत्वो युक्त जल निकासी सेजहर हो चुका है। इस संदर्भ मे राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा तमाम याचिकाओ पर सूनवाई के दरम्यान सामाजिक कार्यकर्ता जगतनारायन विश्वकर्मा की याचिका मे लगाई गयी वर्ष 2014 के पुर्व की तस्वीरो व दर्शाये गये तथ्यो व एनजीटी द्वारा गठित कोर कमेटी की रिपोर्टको संग्यान मे लेकर स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी भी औद्दोगिक संस्थान द्वारा रिहन्द जलाशय मे औद्दोगिक संक्रियाओ की जलनिकासी नही की जायेगी बावजुद इसके औद्दोगिक इकाईयो द्वारा रिहन्द मे प्रदुषित जल निकासी पर लगाम नही लगाया जा सका है।

रिहन्द जलाशय मे प्रदुषण नियंत्रण को लेकर जितनी सख्ती दिखाई जाती  है व साफ करने के प्रयास किये जाते है उसका चार गुना औद्दोगिक संस्थान इस जलाशय को प्रदुषित करते है अभी एनटीपीसी विन्ध्यनगर के ऐश डाईक टुटने के कारण लाखो टन राख जो जल मे मिश्रित था रिहन्द मे चला गया था औरअभी प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड इसके दुष्प्रभाव का आंकलन व इस प्रवाहित राख को निकाले जाने तथा पुनः मुल स्थिति मे लाने हेतु एक्शन प्लान निर्माण भी नही कर पाया था कि एनजीटी द्वारा सिंगरौली-सोनभद्र के भयावह प्रदुषण नियंत्रण के बाबत् एनजीटी द्वारा पारित आदेशो का अनुपालन सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से गठित ओवरसाईट कमेटी कि इलाहाबाद मे हुई बैठक मे कमेटी के समक्ष सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मिश्रा ने अनपरा तापीय परियोजना के ग्राम बेलवादह मे स्थित राख बन्धे से लगातार धारा प्रवाह राख मिश्रित जल(स्लरी) रिहन्द मे छोडे जाने की विडियोज व तस्वीरे प्रस्तुत कर कमेटी को भौचक्का कर दिया की लापरवाहीइस कदर कि 24 घण्टे प्रतिदिन राख रिहन्द मे बहाया जा रहा है जिस पर कमेटी ने नाराजगी जताई थी और सिंगरौली-सोनभद्र के दौरे पर आगमन के दरम्यान स्वयं ओवरसाईट कमेटी ने बेलवादह राख बन्धे का निरीक्षण किया और धारा प्रवाह राख मिश्रित जल रिहन्द मे छोडे जाने और लोगो के पेयजल के स्त्रोत मे जहर मिलाये जाने का भयावह मंजर देखा जिसके उपरान्त एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी ने अनपरा तापीय परियोजना की ईकाईयो को फौरी तौर पर बन्द किये जाने की संस्तुति सहित सिफारीश अपनी रिपोर्ट मे की है व प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड को दुष्प्रभाव का आकंलन करने का निर्देश दिया है जिसके उपरान्त कमेटी द्वारा अनपरा तापीय परियोजना के उपर पर्यावरणीय क्षति के एवज मे जुर्माना लगाया जायेगा और जुर्माने की राशि वसुली जायेगी जो नया नही होगा क्योकि इसके पुर्व भी अधिवक्ता अभिषेक चौबे के माध्यम से एनजीटी मे दाखिल याचिका पर सूनवाई के क्रम मे गठित कमेटी ने औद्दोगिक संस्थानो पर करोडो का जुर्माना लगाया था परन्तु आज तक वसुले गये जुर्माने की राशियो से अभी तक रिहन्द से प्रदुषित कचडे को हटाये जाने को लेकर कोई कवायद नही की गयी हैऐसे मे प्रश्न है कि क्या जुर्माना वसुल कर एकत्रित करने मात्र से हम रिहन्द को साफ कर पायेंगे,,

हमारे भारत की मेनस्ट्रीम मिडिया व पत्रकारो के पास हिन्दु मुस्लिम से अतिरिक्त समय नही है कि वह रिहन्द के प्रदुषण को दिखाये परन्तु इसे दिखाया जाना इसलिये आवश्यक है क्योकि रिहन्द का पानी अन्तिम मे जाकर गंगा मे मिलता है और गंगा को स्वच्छ और निर्मल करना भारत सरकार और प्रधानमंच्री का ड्रीम प्रोजक्ट है जिसके लिये हजारो करोड रुपये पानी की तरह बहाये जा रहा है परन्तु रेणु-रिहन्द को साफ किये बगैर गंगा को साफ करने की उम्मीद करना तो एक स्वप्न मात्र है।

राख बंधे से जमींदोज होते आदिवासियो के घर

अनपरा तापीय परियोजना के राख बन्धे की उंचाई बढाये जाने का कार्य ग्राम बेलवादह के आदिवासी ग्रामीणो के लिये परेशानी का कारण बन गया है। अनपरा तापीय परियोजना द्वारा ग्राम बेलवादह मे स्थित राख बन्धे की उंचाई बढाये जाने का कार्य करवाया जा रहा है जिससे राख बन्धे का राख मिश्रित पानी ग्राम बेलवादह मे स्थित बैगा समुदाय के आदिवासियो के घरो की ओर लगातार बढ रहा है तथा इन आदिवासियो के घर जमींदोज होने की स्थिति मे है व एक-दो आदिवासियो के मकान ध्वस्त भी हो चुके है।
आप सोच रहे होंगे के राख बन्धे के पास यह आदिवासी क्यो निवासरत है, यह इन आदिवासियो का शौक नही बल्कि मजबुरी है क्योकि अनपरा तापीय परियोजना द्वारा इन आदिवासियो के मकानो का अधिग्रहण किये जाने के बाद पुर्नवास प्लाट नही आवंटित किया गया, अधिग्रहण के उपरान्त अनपरा तापीय परियोजना द्वारा अपने राख बन्धे का निर्माण तो कर लिया गया परन्तु इन आदिवासियो के पुर्नवास प्लाट के विषय मे 20 वर्ष से ज्यादा का समय व्यतीत होने के उपरान्त भी कोई चर्चा नही की गयी, अब यह निरीह आदिवासी राख बन्धे के एक ओर स्थित अपने घरो मे रहते है तथा दुसरी ओर राख बन्धे का राख मिश्रित पानी है। आपको गांधीवाद का इससे बडा उदाहरण और कही शायद न देखने को मिले सोचिये की इनमे से कई आदिवासियो के पुर्व के घर इस राख मिश्रित पानी से वर्षो पुर्व जमींदोज हो चुके जिसके बाद इन आदिवासियो ने कुछ दुरी पर नये घर बनाये अब वह घर भी चपेट मे है और इतनी प्रताडना, अमानवीयता के बाद भी यह आदिवासी शान्ति से है और कभी परियोजना के किसी कार्य का विरोध नही करते है और इतनी ज्यादती के बाद भी जिम्मेवार सरकार मौन है।
आप अक्सर पढते होंगे के कोयले से जलने से उत्पन्न राख भयावह व विषाक्त होती है जिसके मानवीय जीवन पर अनेक दुष्प्रभाव है। बेलवादह मे आलम यह है कि यह आदिवासी और इनका परिवार राख बांध के बीच से होकर आवागमन करते है इनके द्वारा पेयजल हेतु प्रयोग किये जाने वाले हैण्डपम्प से महज 20 मीटर की दुरी पर राख मिश्रित जल का जमाव है, जिसके कारण इनका पेयजल भी प्रदुषित हो चुका है तथा दुषित पेयजल का दुष्प्रभाव भी इनके उपर आप साफ देख सकते है।

बिजली व गैस कनेक्शन धारको को नही मिलेगा केरोसिन

बिजली व गैस कनेक्शन धारकों को केरोसिन आने वाले समय मे नही मिलेगा ऐसा निर्णय सरकार लेने जा रही है।सरकार का मानना है की उज्जवला योजना के तहत ज्यादातर लोगों को बिजली व गैस कनेक्शन दिया जा चुका है ऐसे मे उन्हें केरोसिन की आवश्यकता नही है। आपुर्ति विभाग कोटेदारो के माध्यम से इसकी जानकारी जुटा रहा है कि कितने अन्तयोदय व पात्र गृहस्थी कार्ड धारको के पास बिजली व गैस दोनों उपलब्ध है। ऐसे कार्ड धारको को तेल नही दिया जाएगा।

आरटीओ बैरियर बने वसूली का अड्डा

सिगरौली मध्य प्रदेश  सिगरौली जिले से सटे खनहना,मटवई व जयन्त बार्डर पर आरटीओ की अवैध वसूली इन दिनों जोरो पर है।आपको बता दे की अन्य प्रदेशो से आने वाले हैवी वाहनो से आरटीओ विभाग के अधिकृत कर्मचारियों द्वारा 1500सौ रुपया प्रतिमाह वसूली किया जाता है जिसकी शिकायत तमाम वाहन स्वामी द्वारा वहा के शासन से कि गयी है किन्तु कोई कार्यवाही आजतक नही हुआ जिससे वसूली करने वाले लोगों के हौसले बुलंद हैं।

आदिवासी होने की आड मे नाकामी छिपाते ओबरा विधायक वाया सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश की ओबरा(402) विधानसभा से निर्वाचित भाजपा विधायक क्षेत्र की समस्याओ को न सुलझा पाने की नाकामी अपने आदिवासी होने की आड मे छिपा रहे है। रिशी झा नामक एक युवक ने फसबुक पर लिखा कि ओबरा विधायक संजय जी कृपया जल्द से जल्द मुर्धवा मोड से पिपरी तक के रोड के गड्ढे को सही करवाये और संजय सिंह विधायक ओबरा नाम से संचालित फेसबुक आईडी को टैग किया। जिस सडक का अनुरक्षण कराने की मांग इस नवयुवक ने की है वह सडक का हिस्सा औडी से हाथीनाला वास्तव मे अत्यधिक जर्जर अवस्था मे है और आवागमन मे लगभग एक घण्टे से ज्यादा का समय अतिरिक्त समय लग रहा है तथा बस वगैरह की बात तो छोडिये लग्जरी गाडिया भी इस सडक पर दम तोड देती है। 
 

इस सडक की मरम्मत की मांग करने वाले युवक को संजय सिंह विधायक ओबरा नाम से संचालित आईडी से जवाब मिला वह हैरत अंगेज कर देने वाला है तथा यह सिध्द करता है कि आदिवासी होने की आड मे ओबरा विधायक अपनी नाकामी छिपा रहे है। संजय सिंह विधायक ओबरा नाम से संचालित आईडी से जो जवाब मिला वह अक्षरशः हम लिख रहे है आदिवासियो को कोई देखना नही चाहता 

जबकि इस युवक ने आदिवासियो पर कोई टिप्पणी भी नही की है जिस सडक के दुरुस्तीकरण की मांग की है वह आदिवासियो द्वारा प्रयोग मे भी लाई जाती है बजाय़ सडक दुरुस्तीकरण के सम्बन्ध मे अपने किये जा रहे प्रयास अथवा क्या प्रयास किया जायेगा बताने के ओबरा विधायक ने युवक पर ही आदिवासी विरोधी होने का तमगा सौप दिया और अगर ओबरा विधायक द्वारा की गयी टिप्पणी का मतलब निकाले तो यही निकलता है कि अगर आदिवासी विधायक या प्रतिनिधि है तो आप केवल वोट देकर जिताईये आगे कुछ आशा मत कीजिये और अगर आप आशा करते है तो आप आदिवासीयो के विरोधी है।

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

औडी नेहरु चौक की हाईमास्क लाईट चन्द दिनो मे ही हाईमास्क लाईट की मरम्मत भी करा दी जायेगी।

# ग्राम पंचायत औडी द्वारा किया जायेगा भुगतान-पंचायती राज अधिकारी (सोनभद्र)


उर्जांचल के नेहरु चौक की हाईमास्क लाईट लगभग एक साल से खराब है तथा शक्तिनगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण व ग्राम पंचायत के मध्य स्वामित्व व अनुरक्षण की जिम्मेदारी को लेकर विवाद होने के कारण इसकी मरम्मत नही हो पा रही थी। दरअसल यह हाईमास्क लाईट शक्तिनगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा लगवाई गयी थी व तत्पश्चात ग्राम पंचायत औडी को हस्तान्तरित कर दी गयी थी व जिसका रख रखाव अनुरक्षण ग्राम पंचायत औडी को करना है यह शक्तिनगर क्षेत्र प्राधिकरण के अधिकारियो का कहना था व ग्राम पंचायत औडी का कहना था कि लिखित रुप से हस्तान्तरण न होने के कारण ग्राम पंचायत द्वारा इसकी मरम्मत नही कराई जा सकती है व मरम्मत कराये जाने पर भुगतान असम्भव होगा व इस विवाद की गुत्थी न सुलझने के कारण हाईमास्क लाईट की मरम्मत नही हो पा रही थी। 


ग्राम पंचायत औडी के सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति आनन्द कनौजिया ने जिला पंचायत राज अधिकारी-सोनभद्र को इसके विरुध्द शिकायत प्रेषित की थी और कहा था कि ग्राम पंचायत तथा साडा की हाईमास्क लाईट के हस्तान्तरण के विवाद के चलते औडी का नेहरु चौक अन्धेरे मे है और जिससे लोगो को काफी समस्याओ का सामना करना पड रहा है तथा चौराहा होने के कारण दुर्घटनाओ का भय भी बना रहता है। शक्ति आनन्द के पत्र के निस्तारण मे जिला पंचायत राज अधिकारी-सोनभद्र ने जनहित को ध्यान मे रखते हुये निर्देशित करते हुये कहा है कि ग्राम पंचायत औडी द्वारा हाईमास्क लाईट के अनुरक्षण की पत्रावली तैयार कर हाईमास्क लाईट की मरम्मत करवा दी जाती है तो भुगतान कर दिया जायेगा जिसके बाद ग्राम पंचायत औडी द्वारा अब इस हाईमास्क लाईट की पत्रावली तैयार कर भेज दिया गया है तथा चन्द दिनो मे ही हाईमास्क लाईट की मरम्मत भी करा दी जायेगी।

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

एनसीएल ने कोयला उत्पादन व प्रेषण में दर्ज की 6 प्रतिशत की वृद्धि

  • जनवरी तक कंपनी ने किया अब तक के लक्ष्य से अधिक कोयला उत्पादन व प्रेषण
कोल इण्डिया लिमिटेड की अग्रणी अनुषंगी कंपनियों में से एक नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने जनवरी माह के अन्त तक 89.11 मिलियन टन कोयले का उत्पादन एवं 89.81 मिलियन टन कोयले का प्रेषण (डिस्पैच) किया है। कंपनी का कोयला उत्पादन एवं प्रेषण दोनों अब तक के दिये गए लक्ष्य का 103 % हैं।

चालु वित्त वर्ष में कंपनी द्वारा जनवरी माह तक किया गया कोयला उत्पादन विगत वर्ष की समान अवधि के मुक़ाबले 6.24 प्रतिशत अधिक हैं l इसी तरह, जनवरी माह तक कंपनी द्वारा किया गया कोयला प्रेषण भी पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 6.02 प्रतिशत अधिक है l

बिजली घरों को कोयला आपूर्ति के मामले में भी एनसीएल पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि (जनवरी माह के अन्त तक) की तुलना में इस वर्ष 4% अधिक कोयला आपूर्ति की है ।

सिर्फ जनवरी महीने की बात करें तो इस वर्ष जनवरी महीने में कंपनी का कोयला उत्पादन एवं प्रेषण पिछले साल जनवरी महीने में किए गए उत्पादन एवं प्रेषण से अधिक रहा है। एनसीएल ने जनवरी 2020 में 9.5 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है जबकि जनवरी 2020 में कंपनी ने 9.9 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया है।

गौरतलब है कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप कोयला उत्पादन के लिए कंपनी अनवरत प्रयत्त्नशील है l चालू वित्त वर्ष में एनसीएल को 106.50 मिलियन टन कोयला उत्पादन एवं प्रेषण करना है । अब तक के नतीजों को देखते हुए उम्मीद है कि कंपनी लक्ष्य से अधिक कोयला उत्पादन एवं प्रेषण करेगी। वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी कंपनी ने दिये गए लक्ष्यों को पूरा करते हुए 100 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन किया थाl

क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मैच में गोरबी का हुआ कब्जा


सिंगरौली जिले के ग्राम पंचायत पडरी में क्रिकेट टूर्नामेंट के समापन अवसर पर फाइनल मैच गोरबी एवं पड़री के बीच खेला गया जिसमें गोरबी क्रिकेट टीम विजई हुई उक्त अवसर पर विजय खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि के रुप में अमित द्विवेदी प्रदेश सचिव मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए, मुख्य अतिथि अमित द्विवेदी ने कहा कि कई वर्षों से ग्राम पड़री में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता रहा है ऐसे में इस गांव में मिनीं स्टेडियम आवश्यकता महसूस हो रही है श्री द्विवेदी ने कहा कि  खेल  यदि खिलाड़ी भावना से खेला जाता है तो  स्वस्थ मन स्वस्थ शरीर  और  पॉजिटिव  ऊर्जा मिलती है जिससे लोगों के बीच  सामंजस्य एवं प्रेम व्यवहार बढ़ता है  उक्त अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल ने कहा कि पड़री व सोलंग गांव से जिला मुख्यालय पहुंचने हेतु नया मार्ग पड़री से परसोना पहुंच मार्ग बनाया जाने हेतु प्रयास जारी है जिसके लिए कांग्रेस पार्टी प्रयासरत है साथ ही श्री अमित द्विवेदी प्रदेश सचिव द्वारा लगातार छेत्र के विकाश हेतु प्रयास के रहे है जिसमे तेलदह से कसर मार्ग को जोड़ने हेतु भी कांग्रेस पार्टी प्रयास कर रही है उक्त अवसर पर पडरी गांव के वरिष्ठ राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी,पूर्व सरपंच हीरालाल साकेत, अखिलेश पांडे जिलाध्यक्ष कांग्रेस विचारधारा संगठन,विनस कंपनी के सन्दीप वर्मा, राजेस मशी HR,अनिल द्विवेदी ,आर्य प्रसाद द्विवेदी,विनय द्विवेदी, जटाशंकर पाठक,सतेंद्र द्विवेदी,हरीश द्विवेदी, डब्लू पाठक,लक्मी शुक्ला,अतुल शुक्ल,राजा दुबे,रामानुज रजक, सहित कई वरिष्ठ व ग्रामीण जन उपस्थित रहे