शनिवार, 31 मार्च 2012

सोनांचल में पड़ने जा रही एक और संघर्ष की बुनियाद


कहीं भट्टा परसौल न बन जाए बभनी क्षेत्र
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विस्थापन के दर्द को लेकर शायद सेानभद्र में एक और संघर्ष की बुनियाद पड़ने वाली है। यदि विस्थापितों की समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा तो बभनी इलाके को एक और भट्टा परसौल बनाने से बचाया जा सकता है। इसकी प्रमुख वजह धारा बीस (वन भूमि) की जमीनें जिस पर पुरखों से काबिज आदिवासी एवं वनवासी साबित होंगी। इन जमीनों का मुआवजा अधिग्रहण के लिये तय न किए जाने को लेकर पावर प्लांट के निर्माण में प्रभावित हो रहे परिवारों की वजह से पेंच फंस सकता है। अंदर ही अंदर ग्रामीणों द्वारा आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। 

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन द्वारा बभनी में बनाए जाने वाले 1980 मेगावाट के पावर प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया भले ही बड़ी तेजी से अमल में लाई जाती हो, लेकिन यहां से विस्थापित होने वाले भी बिना मुआवजा मिले उसी तेजी से घरों के उजाड़े जाने को लेकर लामबंद हो रहे हैं। बभनी के कई ग्राम पंचायतों में करीब तीन सौ एकड़ धारा बीस की जमीनें भी निर्माण के दायरे में आ रही हैं। इन जमीनों पर रिहंद से विस्थापित होकर आए करीब पंद्रह सौ आदिवासी वर्षों से काबिज हैं। बाप दादा की इन जमीनों पर उनका घर, कुआं, खेत, बागीचा और खलिहान है। केंद्र सरकार ने धारा बीस की जमीनों पर काबिज लोगों को अधिकार देने के लिए वनाधिकार कानून लागू किया है। इस कानून के तहत यहां काबिज लोगों ने वनाधिकार समितियों के सामने अपने-अपने दावे भी कर दिए हैं। जिन्हें अब इन जमीनों का अधिकार पत्र देने की तैयारी चल रही है।

इसी बीच पावर प्लांट के निर्माण के लिए भी प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहा है। धारा बीस की जमीनों पर काबिज तथा विस्थापित होने वालों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उनकी जमीनों का जब मुआवजा तय ही नहीं होगा तो वे जाकर आखिर बसेंगे कहां। इन जमीनों पर काबिज लोगों को न्याय दिलाने के लिए तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी कमर कस ली है। इसके अलावा इलाके में पड़ने वाले पर्यावरण प्रदूषण को भी लेकर लोगों में उबाल है। सोनभद्र में रिहंद बांध के विस्थापन के बाद लोग आज भी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। बभनी में बनाए जाने वाले 1800 मेगावाट के पावर प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया भले ही बड़ी तेजी से अमल में लाई जाती हो, लेकिन यहां से विस्थापित होने वाले भी बिना मुआवजा मिले उसी तेजी से घरों के उजाड़े जाने को लेकर लामबंद हो रहे हैं।

सोमवार, 26 मार्च 2012

पच्चीस ग्राम हिरोइन के साथ दो गिरफ्तार


अर्तंराष्ट्रीय बाजार में किमत दो लाख 
अनपरा पुलिस ने पायी कामयाबी

अनपरा-स्थानीय थाना क्षेत्र में नशे सौदागरों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर अनपरा पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की। मिली जानकारी के अनुसार थानाध्यक्ष शिवानन्द मिश्रा ने मुखबिर कि सूचना पर दो अलग-अलग जगहों पर छापा मारकर दो हिरोइन बेचने वाले को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जानकारी के मुताबिक राजेश पाठक उर्फ राजू पिता राम दूलारे उम्र 26 वर्ष व संतोष कुमार पटेल पिता अशोक कुमार अनपरा कालोनी को पुलिस ने 25 ग्राम हिरोइन व पीने के सामग्री के साथ गिरफ्तार कर दोनों को थानाध्यक्ष शिवानन्द ने पत्रकारों के सामने पेश किया। पूछ ताछ के दौरान आरोपी संतोष ने बताया कि इस क्षेत्र में हिरोइन जैसे नशे को फैलाने वाला राजेश पाठक उर्फ राजू है। जिसके द्वारा बड़े पैमाने पर नशे की खेप लोगों तक पहुचायी जाती रही है। राजेश पाठक द्वारा ओबरा व रेनूकूट से इसकी खेप उठाता था। पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद जब उसकी तलाशी ली गयी तो मोजे और जूते के शोल में छिपाकर रखे लगभग 70 पुडि़या हिरोइन को बरामद किया गया। आरोपियो ने हिरोइन के इस कारोबार का तार मुगलसराय से जुड़े होने की बात कबुली। आरोपियों की माने तो इस क्षेत्र में लगभग एक हजार लोग इस नशे का सेवन करने वाले है। जब इतने लोग ऐसा नशा करने वाले है ंतो बेचने वाले आये दिन पैदा होते रहेगें। क्षेत्र में बढ़ते नशे की लत के कारण जहाँ युवा अपने जीवन गर्त मे डाल रहे है वहीं नशे के सौदागर इस युवाओं के नशे के कुए में डाल मोटी रकम इक्ठठा कर रहे है। पुलिस काफी दिन से इस कारोबार का खुलासा करने मे लगी थी जिसके अतंर्गत कुछ दिन पूर्व राजू पाठक को पकड़ा गया था लेकिन तलाशी के दौरान माल बरामद नहीं हो सका था। गुरूवार को मुखबिर की सूचना पर की गयी घेराबंदी में राजू पटेल को आरपीएल औड़ी पेट्रोल पम्प से पकड़ा गया। मौके पर ली गयी तलाशी के दौरान जहाँ राजू के पास से लगभग 70 पुडि़या हिरोइन बरामद हुयी वहीं आवासीय परिसर से पकड़ा गया आरोपी संतोष के पास से लगभग 25 पुडि़या हिरोइन बरामद हुयी। पकड़ने वाले टीम मे वंशराज पटेल, विवेेक दूबे, अरूण यादव, राजेश विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे, तथा आरोपियों को पुलिस ने 8/21 एनडीपीएस एक्ट में जेल भेज दिया। 

सोमवार, 19 मार्च 2012

पेट की आग ने बना दिया कलाकार


यह बिल्कुल सच है की पेट की आग किससे क्या ना करवा दे। इसका जीता जागता उदाहरण है राजस्थान के रहने वाले अनील उर्फ थाणाराम जो एक खानाबदोष मूर्ति बनाकर बेचने वाले कारीगर है। ये मुर्तिया वह वाइट सिमेन्ट एवं प्लास्टर आफ पेरिस की सहायतता से सांचे में ढाल कर बनाते है। वर्तमान में उर्जान्चल में अपना डेरा डाले यह अनील अपनी पत्नी, छोटे भाई व दो बच्चो के साथ लगभग एक माह के लिये यहा अपनी बनाई मुर्तिया बेचने आये है। उनका कहना है कि बेरोजगारी व गरीबी के चलते वह अपने परिवार के पालने के लिये इस क्षेत्र में कार्य करना प्रारम्भ किया और धीरे-धीरे अपने भाई व पत्नी को भी इस काय से जोड़ा, जिससे तीनों मिलकर एक दिन में कम से कम 10 मुर्तिया बना लेते है। इनके द्वारा बनाये गये मुर्ति की बाजार में किमत ज्यादा तो नहीं पर इतना जरूर है, जिससे इन्हे दो वक्त की रोटी तो मिल ही जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि हमारा परिवार साल के हर माह में कभी उत्तर प्रदेष, मध्य प्रदेष, छत्तिसगढ़ तथा गुजरात के कई शहरो में खानाबदोषों की तरह तम्बू लगाकर अपने इस कलाकारी की बदौलत रोजी-रोटी कमाने घुमती रहती है। अनील की पत्नी बताती है कि जब मेरे पति ने यह कार्य करना प्रारम्भ किया तब मैं भी इनके साथ हाथ बटाने के लिये इनके साथ यह काम करने लगी। जिससे हम एक दिन में ज्यादा मुर्तिया बना पाते है। लेकिन इन सबका कहना है कि उदनके द्वारा बनाई गई मूर्तियों की सही किमत आज भी बाजार में नहीं मिलती जिससे धीरे-धीरे इ स कला का पतन हो रहा हैै और आजकल फैन्सी जमाने में इन मुर्तियों की पहचान खत्म हो रही है। जिससे उनके तरह ढे़रो कलाकरों के सामने बेरोजगार हो जाने का डर बना रहता है।